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इंदौर: एक का निर्माण PWD ने शुरू भी कर दिया, तो बगल में दूसरा प्राधिकरण बनाएगा

May 09, 2026

एमआर-12 रेलवे लाइन पर बनेंगे तीन-तीन लेन के दो फ्लायओवर

नदी पर बन रहे सिक्स लेन फ्लायओवर का काम भी हो गया शुरू

इंदौर। सिंहस्थ (Simhastha) के मद्देनजर प्राधिकरण एमआर-12 (MR-12) का निर्माण पूरा कराने में जुटा है। हालांकि अलाइनमेंट संशोधन की प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह से हल नहीं हुई। दूसरी तरफ रेलवे ओवरब्रिज (flyover)  पर सिक्स लेन के सिंगल फ्लायओवर की बजाय अब तीन-तीन लेन केे दो फ्लायओवर बनाए जाएंगे। लोक निर्माण विभाग ने एक तीन लेन के फ्लायओवर का निर्माण भी मौके पर शुरू कर दिया, जिसके चलते अब उसके बगल में दूसरा तीन लेन का फ्लायओवर प्राधिकरण को बनवाना पड़ रहा है, जिसके लिए जल्द ही टेंडर बुलवाए जाएंगे। एमआर-12 पर ही एक दूसरा सिक्स लेन का फ्लायओवर नदी के ऊपर निर्मित किया जा रहा है। हालांकि अभी भी 2000 से अधिक मकानों की बस्ती हटाने का काम भ ी शेष है।



  • एमआर-11 के साथ-साथ एमआर-12 का निर्माण इसलिए जरूरी है, ताकि एमआर-10 के घने यातायात का दबाव कम हो सके। सिंहस्थ में तो सबसे अधिक दबाव एमआर-10 पर ही रहेगा, जिसके चलते प्रयास किए जा रहे हैं कि एमआर-12 का काम पूरा हो जाए, जिससे बायपास से रिंग रोड, एबी रोड होते हुए सीधे भौंरासला, उज्जैन रोड पर पहुंचा जा सके। प्राधिकरण ने इसीलिए एमआर-12 के निर्माण को पूरा करने की जिम्मेदारी ली है। हालांकि इसमें रविदास नगर बस्ती को हटाना और वहां के प्रभावितों को शिफ्ट करवाने की कवायद भी बची है। दूसरी तरफ कैलोदहाला की रेलवे लाइन पर पहले प्राधिकरण सिक्स लेन का फ्लायओवर बना रहा था और रेलवे से भी इसकी मंजूरी ले ली थी। मगर पीडब्ल्यूडी ने परवारे ही तीन लेन के फ्लायओवर के टेंडर बुलाकर मौके पर काम भी शुरू करवा दिया और रेलवे से भी अनुमति नहीं ली, जिसके चलते प्राधिकरण को अब मजबूरी में उसके बगल में दूसरा फ्लायओवर बनवाना पड़ रहा है, जिसके टेंडर बुलाए जाएंगे। वहीं नदी के ऊपर बन रहे सिक्स लेन का काम अवश्य शुरू है। पहले प्राधिकरण ने कैलोदहाला की रेलवे लाइन पर फ्लायओवर ब्रिज सिक्स लेन में निर्मित करवाने का निर्णय लिया था और उसके टेंडर भी बुलवाए। मगर उसी बीच पता चला कि लोक निर्माण विभाग ने अपने स्तर पर ही तीन लेन का पुल बनाने का निर्णय लेकर टेंडर भी बुला लिए। जबकि मौके पर सिक्स लेन फ्लायओवर की जगह तय की गई। अब दोनों ब्रिज गुणवत्ता के साथ तकनीक के मामले में भी अलग-अलग रहेंगे। वहीं यहां रोड अलाइनमेंट की भी समस्या आ रही है। दरअसल, कुछ अभिन्यास टीएनसीपी ने मंजूर कर रखे हैं, जहां कॉलोनियां विकसित हो गई और कई जगह निर्माण कार्य भी कर लिए गए, जिसके चलते अलाइनमेंट में परिवर्तन के लिए प्राधिकरण पिछले कई समय से जुटा हुआ है। मगर अभी तक शासन ने मंजूरी नहीं दी। एक और बड़ी समस्या 2000 से अधिक कच्चे-पक्के मकानों की अवैध बस्ती भी है, जहां रहने वाले लोगों को शिफ्ट किया जाना है। चूंकि प्राधिकरण के पास फिलहाल शिफ्ट करने की कोई व्यवस्था नहीं है। लिहाजा नगर निगम से भी प्रधानमंत्री आवास योजना में बनाए और खाली पड़े फ्लेटों की जानकारी मांगी है। दूसरी तरफ प्राधिकरण सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े का कहना है कि यहां रह रहे लोगों का सर्वे कराया जा रहा है और पात्रता के हिसाब से इनका व्यवस्थापन किया जाएगा। दूसरी तरफ एमआर-12 का निर्माण सिंहस्थ से पहले करना इसलिए जरूरी है ताकि उज्जैन आने-जाने के लिए एक बेहतर आउटर विकल्प मिल सके और शहर के बाहर से ही बस, ट्रक सहित अन्य बड़े वाहनों का आवागमन हो सके। पहले एबी रोड और बायपास के बीच वाली बस्ती के हिस्से पर 24 मीटर के एलिवेटेड कॉरिडोर के विकल्प पर भी चर्चा हुई। मगर राशि के साथ निर्माण में भी अधिक समय लगने के चलते इस योजना को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। 11 किलोमीटर लम्बी और 60 मीटर चौड़ी एमआर-12 रोड बनने से लवकुश चौराहा से एबी रोड, तलावलीचांदा से बायपास तक कनेक्टीविटी मिलेगी। अभी एमआर-10 और 11 पर ही यातायात का दबाव अधिक रहता है।

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