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क्या ChatGPT आपकी निजी बातें बेच रहा? OpenAI पर लगा बड़ा आरोप

May 15, 2026

डेस्क: ओपनएआई एक नए कानूनी विवाद में घिर गया है. अमेरिका में दायर एक क्लास एक्शन मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने ChatGPT यूजर्स की निजी जानकारी गूगल और मेटा के साथ साझा की. रिपोर्ट के मुताबिक इसमें यूजर्स की क्वेरी, ईमेल एड्रेस और निजी डाटा तक शामिल हो सकता है. मामला सामने आने के बाद AI प्लेटफॉर्म की प्राइवेसी और डाटा सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. मुकदमे में दावा किया गया है कि चैटजीपीटी वेबसाइट पर मौजूद ट्रैकिंग टूल्स के जरिए यह डाटा ऑटोमैटिक तरीके से इकट्ठा किया गया. हालांकि अभी तक ओपनएआई की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है. मामला फिलहाल अदालत में है और आरोपों की जांच बाकी है.

कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में दायर इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि ओपनएआई ने चैटजीपीटी वेबसाइट पर मेटा पिक्सल और गूगल एनालिटिक्स जैसे ट्रैकिंग टूल्स लगाए थे. शिकायत के अनुसार, इन टूल्स के जरिए यूजर्स की गतिविधियों और निजी जानकारी को ट्रैक किया गया और फिर गूगल तथा मेटा जैसी कंपनियों तक पहुंचाया गया. मुकदमे में कहा गया है कि कई लोग AI चैटबॉट को निजी और सुरक्षित जगह मानकर इस्तेमाल करते हैं. लोग इसमें मेडिकल सलाह, कानूनी परेशानी, आर्थिक जानकारी और निजी समस्याओं से जुड़े सवाल पूछते हैं. ऐसे में यूजर्स को यह उम्मीद रहती है कि उनकी बातचीत पूरी तरह निजी रहेगी. शिकायत में कहा गया कि चैटजीपीटी पर प्राइवेसी का मुद्दा लोगों के निजी डाटा नियंत्रण से जुड़ा बड़ा मामला बन चुका है.


  • मामले का केंद्र वेबसाइट पर इस्तेमाल होने वाले ट्रैकिंग टूल्स हैं. मेटा पिक्सल और गूगल एनालिटिक्सऐसे कोड होते हैं जिन्हें वेबसाइट ऑपरेटर ट्रैफिक मापने और विज्ञापन टारगेटिंग के लिए इस्तेमाल करते हैं. आसान भाषा में समझें तो अगर कोई यूजर ऑनलाइन नया टीवी सर्च करता है और बाद में दूसरी वेबसाइट पर उसी टीवी के विज्ञापन देखने लग जाता है, तो उसके पीछे यही सिस्टम काम करता है. मुकदमे में दावा किया गया है कि ChatGPT पर मौजूद ऐसे ट्रैकर्स यूजर्स की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रहे थे. अगर अदालत में ये आरोप सही साबित होते हैं तो इसका मतलब होगा कि चैटजीपीटी पर पूछे गए सवालों का इस्तेमाल यूजर्स को टारगेटेड विज्ञापन दिखाने के लिए किया जा सकता था. हालांकि फिलहाल यह केवल आरोप हैं और अदालत में इनकी पुष्टि होना बाकी है.

    मुकदमे में कहा गया है कि ओपनएआई ने कैलिफोर्निया इनवेजन ऑफ प्राइवेसी एक्ट और इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशंस प्राइवेसी एक्ट जैसे कानूनों का उल्लंघन किया हो सकता है. यह मामला उन अमेरिकी यूजर्स को कवर करता है जिन्होंने चैटजीपीटी वेबसाइट पर सवाल पूछे थे. शिकायत में कोर्ट से हर्जाना दिलाने और कथित डाटा शेयरिंग प्रथा को रोकने की मांग की गई है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इसी तरह का एक मामला पहले Perplexity AI के खिलाफ भी दर्ज किया गया था, जिसमें मेटा और गूगल ट्रैकर्स के इस्तेमाल का आरोप लगा था. हालांकि वह मामला बाद में वापस ले लिया गया. इस नए विवाद ने एक बार फिर AI प्लेटफॉर्म पर यूजर प्राइवेसी और डाटा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.

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