
नई दिल्ली: तमिलनाडु की राजनीति में राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु’ को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. गुरुवार (21 मई) को टीवीके प्रमुख और मुख्यमंत्री विजय की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार के 23 विधायकों के मंत्री पद की शपथ लेने के दौरान राज्य गीत को पहले से तय परंपरा के उलट सबसे आखिर में बजाया गया.
समारोह में सबसे पहले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ बजाया गया, उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और आखिरी में तमिल राज्य गीत बजाया गया. ठीक एक हफ्ते पहले मुख्यमंत्री विजय के अपने शपथ ग्रहण समारोह में भी ऐसा ही हुआ था, जिसके बाद भारी हंगामा हुआ था.
लगातार दूसरी बार हुई इस घटना पर विपक्ष ही नहीं टीवीके की अगुवाई वाली सरकार के सहयोगी दल भी गुस्से में हैं. विवाद पर सफाई देते हुए विजय की पार्टी तमिलगा वेट्रि कड़गम (TVK) के नेता नंजिल संपत ने कहा, ‘आज (21 मई) को मंत्रियों की शपथ का कार्यक्रम राजभवन ने आयोजित किया गया था, इसलिए तमिल गीत आखिरी में गाया गया. इसमें तमिलनाडु सरकार की कोई भूमिका नहीं थी. विधानसभा में तमिल गीत सबसे पहले ही गाया जाएगा.’
रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले सरकार के मंत्री आधाव अर्जुना ने दावा किया था कि केंद्र सरकार के नए सर्कुलर की वजह से राज्यपाल की तरफ से तमिल गान को तीसरे स्थान पर रखने का दबाव था.
मुख्य विपक्षी दल DMK ने नई सरकार को आड़े हाथों लिया है. DMK प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘पिछली बार आश्वासन देने के बावजूद TVK सरकार फिर नाकाम रही. यह तमिल अधिकारों की रक्षा करने में असमर्थ रही है.’ यही नहीं सरकार को समर्थन दे रही कांग्रेस और वामपंथी दल (CPI) भी इस फैसले से नाराज हैं. CPI सचिव एम. वीरपांडियन ने इसे स्थापित परंपरा का उल्लंघन बताया. वहीं, कांग्रेस की सांसद एस. जोतिमणि ने कहा, ‘यह बहुत अनुचित है. बीजेपी सरकार राज्यपाल कार्यालय के जरिए तमिल लोगों की भावनाओं और संस्कृति के साथ राजनीति कर रही है.’
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