कोलकाता। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में इन दिनों अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेता नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि पार्टी के भीतर बड़े बदलाव की मांग तेज हो सकती है।
पूर्व राज्यसभा सांसद Shantanu Sen ने गुरुवार को टीएमसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सांसद Kakoli Ghosh Dastidar भी अपने सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
इसी बीच, ममता बनर्जी के लंबे समय से करीबी माने जाने वाले पार्षद तारक सिंह ने भी पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर की है। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पार्टी को नए नेतृत्व की जरूरत है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ममता बनर्जी को हटाने की बात कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “हां, मैं यही कह रहा हूं। जो नेतृत्व कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा नहीं रह सकता और जो असफल हो चुका है, उसमें बदलाव जरूरी है।”
दूसरी ओर, शांतनु सेन ने अपने इस्तीफे पत्र में पार्टी से जुड़ी कई विवादित घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उन्होंने पार्टी का सार्वजनिक मंचों पर बचाव किया, भले ही कई बार उनकी अंतरात्मा इससे सहमत नहीं थी। सेन ने लिखा कि आरजी कर अस्पताल मामले, नौकरी घोटाले और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के बाद अब उनके लिए पार्टी का बचाव करना नैतिक रूप से संभव नहीं रह गया है।
टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी और वरिष्ठ नेताओं के बगावती तेवरों ने संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में पार्टी के अंदर राजनीतिक उठापटक और तेज हो सकती है।
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