img-fluid

ममता बनर्जी के समर्थन में अभिषेक का बड़ा दांव, बागी नेताओं से कहा- वापस लौटिए, मैं एक घंटे में पद छोड़ दूंगा

July 19, 2026

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के भीतर जारी राजनीतिक उथल-पुथल अब और अधिक तीखी होती दिखाई दे रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने बागी नेताओं ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को खुली चुनौती देते हुए स्पष्ट कहा है कि यदि वे सभी ममता बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए दोबारा पार्टी में लौट आते हैं, तो वह एक घंटे के भीतर अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। उनके इस बयान ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और पार्टी के भीतर चल रहे मतभेद (Differences) को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है।

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जो नेता पार्टी छोड़कर जा चुके हैं और वर्तमान संकट के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, वे पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व में वापसी करके अपनी निष्ठा साबित करें। उनका कहना है कि यदि वास्तव में पार्टी में विवाद की वजह वही हैं, तो वह बिना किसी हिचकिचाहट के अपना पद छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बागी नेताओं ने राजनीतिक लाभ के लिए विपक्षी दलों के साथ समझौता किया है और अब अपनी राजनीतिक रणनीति को सही ठहराने के लिए उन पर व्यक्तिगत आरोप लगाए जा रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस में हाल के दिनों में कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के पार्टी से अलग होने के बाद संगठनात्मक संकट गहरा गया है। कुछ पूर्व सांसदों और विधायकों ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अलग रास्ता अपनाया है। वहीं, पार्टी के भीतर एक अलग गुट बनने के दावों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। इस गुट ने खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताते हुए संगठन और चुनाव चिन्ह को लेकर भी अपना दावा पेश किया है, जिससे राजनीतिक संघर्ष और तेज हो गया है।

राज्य विधानसभा में भी स्थिति लगातार बदलती नजर आ रही है। बड़ी संख्या में विधायकों के अलग गुट में शामिल होने की खबरों के बीच नए नेतृत्व के चयन और संगठनात्मक दावों ने पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल नेतृत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भविष्य, संगठनात्मक नियंत्रण और राजनीतिक दिशा से भी जुड़ा हुआ है।

इस बीच पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी नेतृत्व शैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया अत्यधिक केंद्रीकृत हो गई है, जिससे संगठन के भीतर असंतोष बढ़ा है। दूसरी ओर, पार्टी नेतृत्व का दावा है कि मौजूदा संकट राजनीतिक दबाव और विरोधियों की रणनीति का परिणाम है तथा अधिकांश कार्यकर्ता अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं।

राजनीतिक विवाद के बीच दक्षिण 24 परगना जिले के आमतला स्थित अभिषेक बनर्जी से जुड़े पार्टी कार्यालय पर प्रशासनिक कार्रवाई भी चर्चा का विषय बन गई है। प्रशासन ने निर्माण नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए इमारत को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की। इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। अभिषेक बनर्जी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए कहा कि भवन सभी आवश्यक अनुमतियों के अनुरूप बनाया गया था और इस मामले को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।


  • पश्चिम बंगाल की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच तृणमूल कांग्रेस का यह आंतरिक संकट आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि बागी नेताओं और पार्टी नेतृत्व के बीच टकराव आगे किस मोड़ पर पहुंचता है और संगठन इस चुनौती से किस तरह उबरने की कोशिश करता है।

    Share:

  • महिला डॉक्टर से मारपीट मामले में शिवसेना नेता को हाई कोर्ट का बड़ा झटका, जमानत रद्द कर सरेंडर का आदेश, पुराने आपराधिक रिकॉर्ड पर जताई कड़ी नाराजगी

    Sun Jul 19 , 2026
    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में महिला डॉक्टर के साथ मारपीट के मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने शिवसेना (Shiv Sena) नेता और एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के समर्थक रमेश म्हात्रे (Ramesh Mhatre) को दी गई जमानत रद्द करते हुए उन्हें निर्धारित समय के भीतर अदालत के समक्ष […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved