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ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए ओंकारेश्वर आएंगी राष्ट्रपति मुर्मू, निमाड़ में उत्साह का माहौल, तैयारियां तेज

June 05, 2026

ओंकारेश्वर। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए 18 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रस्तावित दौरा खास माना जा रहा है। यदि यह दौरा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न होता है, तो वे राष्ट्रपति पद पर रहते हुए ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति होंगी। इससे पूर्व वर्ष 1988 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकटरमण ओंकारेश्वर पहुंचे थे। उन्होंने आदि गुरु शंकराचार्य जयंती के अवसर पर भगवान आदि गुरु शंकराचार्य के गुरु श्री गोविंद भगवत्पादाचार्य गुफा के जीर्णोद्धार कार्य का लोकार्पण किया था। उस समय उनका आगमन भी ओंकारेश्वर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हुआ था।

शासन स्तर पर तैयारियां तेज
हालांकि, देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा तथा श्रीमती प्रतिभा पाटिल भी ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए आए थे, लेकिन उस समय वे राष्ट्रपति पद पर नहीं थे। इस कारण राष्ट्रपति पद पर रहते हुए ओंकारेश्वर आने वाले राष्ट्रपतियों की सूची में अब तक केवल आर. वेंकटरमण का नाम दर्ज है और अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस गौरवशाली परंपरा की दूसरी कड़ी बनने जा रही हैं।


  • राष्ट्रपति के संभावित दौरे को लेकर शासन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था, दर्शन व्यवस्था, आवागमन, रात्रि विश्राम व प्रोटोकॉल संबंधी सभी व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन को निर्देश जारी किए गए हैं। राष्ट्रपति के स्वागत के अवसर पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अनेक वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति संभावित है।

    दौरे की तैयारियों का जायजा लेने के लिए खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता व पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने शुक्रवार को ओंकारेश्वर का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मंदिर परिसर, सुरक्षा मार्ग, हेलिपैड तथा अन्य व्यवस्थाओं का अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दिए।

    इस वजह से पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी नहीं कर पाए थे दर्शन
    गौरतलब है कि अब तक कोई भी प्रधानमंत्री अपने कार्यकाल के दौरान भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने नहीं पहुंचा है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ओंकारेश्वर बांध के भूमि पूजन कार्यक्रम में अवश्य आए थे, पर घुटनों में तकलीफ के कारण वे ज्योतिर्लिंग मंदिर तक नहीं जा सके थे। उन्होंने हेलिपैड परिसर में ही पूजा-अर्चना की थी। इसके बाद ओंकारेश्वर बांध का भूमि पूजन कर ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और वापस लौट गए थे।

    राष्ट्रपति के आगमन को लेकर उत्साह का वातावरण
    देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2023 में आदि गुरु शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा के लोकार्पण और ओंकारेश्वर आगमन कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे, लेकिन उस दौरान हुई भारी वर्षा और नर्मदा नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण सुरक्षा मानकों को देखते हुए उनका दौरा स्थगित कर दिया गया था। बाढ़ की चपेट में ओंकारेश्वर का बड़ा हिस्सा आ गया था, जिसके चलते कार्यक्रम आयोजित नहीं हो सका।

    नर्मदा तट पर स्थित ओंकारेश्वर केवल एक ज्योतिर्लिंग ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, अद्वैत दर्शन और आदि गुरु शंकराचार्य की आध्यात्मिक साधना से जुड़ा एक वैश्विक तीर्थ है। ऐसे में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन न केवल ओंकारेश्वर बल्कि पूरे निमाड़ अंचल के लिए गौरव और ऐतिहासिक महत्व का अवसर माना जा रहा है।

    स्थानीय नागरिकों, संत समाज, मंदिर ट्रस्ट तथा प्रशासनिक अधिकारियों में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर उत्साह का वातावरण है। आगामी दिनों में सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक अमले की गतिविधियां और तेज होने की संभावना है, जिससे यह दौरा पूरी गरिमा और भव्यता के साथ संपन्न हो सके।

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