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Gold ETF से निवेशकों की दूरी, मई में निकले 725 करोड़ रुपये, Silver ETF में बरकरार रही चमक

June 11, 2026

नई दिल्‍ली । कुछ महीने पहले तक सोना और चांदी (Gold and Silver) निवेशकों की पहली पसंद बने हुए थे। शेयर बाजार (Stock Market) की अनिश्चितताओं के बीच बड़ी संख्या में लोग Gold और Silver ETF में निवेश कर रहे थे। सोशल मीडिया पर निवेश सलाहों की भरमार थी और एसेट मैनेजमेंट कंपनियां भी नए-नए फंड और ETF लॉन्च कर निवेशकों को आकर्षित करने में जुटी थीं।

इस उत्साह की सबसे बड़ी वजह सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी थी। बीते कुछ वर्षों में दोनों की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला, जिससे निवेशकों को शानदार रिटर्न हासिल हुआ। कई निवेशकों ने कम समय में ही अच्छा मुनाफा कमाया, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग FOMO (छूट जाने के डर) के कारण भी इस निवेश की ओर आकर्षित हुए।

हालांकि अब स्थिति बदलती नजर आ रही है। सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ गया है। न सिर्फ निवेशकों ने खरीदारी कम कर दी है, बल्कि Gold ETF से बड़े पैमाने पर पैसा भी निकालना शुरू कर दिया है।


  • भारतीय म्यूचुअल फंड संघ (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में Gold ETF से 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसके ठीक एक महीने पहले अप्रैल में इस श्रेणी में 3,040 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ था। करीब एक साल तक लगातार खरीदारी के बाद यह पहला बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

    हालांकि निकासी के बावजूद Gold ETF का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) मजबूत बना हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में यह लगभग तीन गुना बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो सोने में दीर्घकालिक निवेशकों की रुचि को दर्शाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों की मुनाफावसूली, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं। INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी का कहना है कि बाजार अब महंगाई से बचाव के लिए सोना खरीदने के बजाय ब्याज दरों के जोखिम को ध्यान में रखकर निवेश का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है।

    दासानी के मुताबिक, अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़ों ने यह संभावना बढ़ा दी है कि महंगाई अपेक्षा से अधिक समय तक बनी रह सकती है। इससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है। चूंकि सोना कोई नियमित आय नहीं देता, इसलिए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में मजबूती आने पर इसे होल्ड करने की लागत बढ़ जाती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सोने की कीमतों में तेज उछाल के बाद वैश्विक स्तर पर निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने से भी कीमतों पर दबाव बढ़ा है। हालांकि लंबी अवधि के पोर्टफोलियो हेज के रूप में सोने की उपयोगिता अब भी बरकरार है।

    दूसरी ओर, Silver ETF में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। मई 2026 में इस श्रेणी में 2,133 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग में वृद्धि की उम्मीद और ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते उपयोग के कारण चांदी को समर्थन मिल रहा है।

    दासानी के अनुसार, सौर ऊर्जा, विद्युतीकरण और आपूर्ति संबंधी चुनौतियां चांदी के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को मजबूत बनाती हैं। हालांकि निकट अवधि में इसकी कीमतों की दिशा अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की नीतियों पर निर्भर रहेगी।

    (नोट: सोना या चांदी में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।)

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