
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) से न्यूज पोर्टल न्यूजक्लिक (News portal NewsClick) को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने न्यूजक्लिक और उसके संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दिल्ली पुलिस और ईडी (Delhi Police and ED) की ओर से दर्ज मामलों को रद्द कर दिया है। अदालत का कहना है कि इन मामलों को जारी रखना कानून का गलत इस्तेमाल होगा। न्यूजक्लिक पर 2018-19 में विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों के उल्लंघन का आरोप था। इसके बाद ईडी ने मनीलॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था।
प्राथमिकी जारी रखना गलत हो जाएगा
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से दर्ज प्राथमिकी को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल के अलावा और कुछ नहीं है। पीठ ने यह भी कहा कि एक बार जब संबंधित अपराध के तहत प्राथमिकी रद्द कर दी गई तो मामले में ईडी की शिकायत रिपोर्ट भी बंद की जा सकती है।
क्या आरोप?
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की 2020 की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि न्यूजक्लिक की पेरेंट कंपनी पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड ने आर्थिक वर्ष 2018-19 के दौरान वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी यूएसए से 9.59 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेश निवेश (एफडीआई) कराया, जो विदेश निवेश कानून का उल्लंघन है। इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है।
इसमें दावा किया गया कि एक डिजिटल न्यूज वेबसाइट में एफडीआई की कथित 26 फीसदी की सीमा से बचने के लिए कंपनी के शेयरों का मूल्य बहुत ज्यादा लगाकर निवेश किया गया था। इस निवेश का 45 फीसदी से ज्यादा इस्तेमाल गलत मकसद से सैलरी, कंसल्टेशन फीस, किराए वगैरह के तौर पर हस्तांतरित कर दिया गया था।
आपराधिक धोखाधड़ी के अपराध साबित नहीं
इसके बाद ईडी ने न्यूजक्लिक, पुरकायस्थ एवं दूसरों के खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज किया गया था। पीठ ने माना कि निवेश प्राप्त करना याेग्य प्रक्रिया के हिसाब से था। धोखाधड़ी या आपराधिक धोखाधड़ी के अपराध साबित नहीं हुए हैं।
मनीलॉन्ड्रिंग का अपराध हुआ नहीं पता चल रहा
कहा गया कि ईडी ने लगभग डेढ़ साल से जांच की है। याचिकाकर्ता के साथ उसके कर्मचारियों को भी कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया लेकिन आज तक कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला है या रिकॉर्ड में नहीं रखा गया है। पीठ ने कहा कि आपराधिक साजिश होने के साफ दावों के अलावा किसी भी ऐसे आरोप की कोई चर्चा नहीं है, जिससे दूर से भी यह पता चले कि धनशोधन अधिनियम की धारा 4 के तहत सजा वाला अपराध हुआ है।
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