
इंदौर। नगर निगम ( Municipal Corporation) द्वारा आए दिन किए जाने वाले अजूबे कारनामे सामने आते रहते हैं। ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) में भाग लेने के लिए आए विदेशी मेहमानों (Foreign guests) को राजबाड़ा (Rajwada) के चौक का खतरनाक मकान नहीं दिखे इसके लिए निगम के अधिकारियों ने इस मकान के खतरनाक हिस्से पर ग्रीन नेट लगा दी।
दिखाने के लिए तो नगर निगम द्वारा बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए शहर में खतरनाक मकान तोडऩे का अभियान चलाया जा रहा है। निगम के अधिकारियों का दावा है कि अब तक 26 खतरनाक मकान या तो नगर निगम द्वारा तोड़ दिए गए हैं या फिर स्वयं मकान मालिक द्वारा तुड़वा लिए गए हैं। पूरे शहर में 58 मकानों को निगम द्वारा परंपरागत रूप से खतरनाक माना जा रहा है। इन मकानों की सूची में इस साल 16 नए मकान जोड़े गए हैं। निगम तो इन मकानों की सूची में नए मकान जोडक़र अपने कत्र्तव्य को पूरा कर लेता है। सांकेतिक तौर पर निगम द्वारा हर साल बारिश का मौसम आने से पहले कुछ मकानों पर कार्रवाई कर दी जाती है। राजबाड़ा चौक का एक मकान पिछले कई सालों से निगम के खतरनाक मकानों की सूची में शामिल है। इस मकान पर दबाव-प्रभाव की राजनीति के चलते निगम ने अब तक कभी भी कार्रवाई नहीं की है। इस साल भारत सरकार द्वारा इंदौर में ब्रिक्स देश के प्रतिनिधियों का सम्मेलन आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए आए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों को राजबाड़ा पर भी भ्रमण के लिए ले जाया गया था। वहां पर इन प्रतिनिधियों को यह खतरनाक स्थिति वाला मकान नजर नहीं आए इसके लिए निगम के अधिकारियों ने जुगाड़ जमाई। इन अधिकारियों ने मकान के खतरनाक हिस्से को ग्रीन नेट से ढंक दिया। निगम के अधिकारियों ने ऐसा करते हुए मकान के खतरनाक हिस्से को लोगों को दिखने से तो बचा लिया, लेकिन इससे इस हिस्से के कारण पैदा होने वाला खतरा समाप्त नहीं हो गया है। जिस हिस्से में ग्रीन नेट लगाई गई है उसके ठीक नीचे दुकान बनी हुई है, जहां हर दिन सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ लगी रहती है। एक खानपान की दुकान है, जिसमें लोग अपनी पेटपूजा के लिए आते हैं। बाकी रेडीमेड गारमेंट की दुकानें हैं, जहां लोग खरीदी करने के लिए आते हैं। निगम अधिकारियों का कहना है कि इस मकान के खतरनाक हिस्से को तोडऩे की अभी कोई योजना नहीं है।
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