
रेलवे ने दो लेन घटाई, 139 करोड़ की मंजूरी के साथ 15 महीने में बनाने का दावा
आरएनटी मार्ग में भी करना पड़ेगा बदलाव
इन्दौर। 1953 में लोकार्पित शहर के सबसे महत्वपूर्ण शास्त्री ब्रिज (Shastri Bridge) का भी नवनिर्माण होना है। हालांकि रेलवे (Railway) ने 6 के बजाए 4 लेन (4-lane) का ही ब्रिज मंजूर किया है और इसके लिए 139 करोड़ रुपए की राशि को मंजूरी दी है। 15 महीने में ब्रिज का निर्माण करने का दावा भी किया गया है और यह ब्रिज वर्तमान की तुलना में डेढ़ गुना अधिक चौड़ा और 30 मीटर ज्यादा लंबा होने के साथ 2.7 मीटर ऊंचा बनेगा। शहर केपूर्वी क्षेत्र को पश्चिम से जोडऩे वाले इस ब्रिज के निर्माण के दौरान यातायात किस तरह से डायवर्ट किया जाएगा, वह एक बहुत बड़ा सवाल है।
72 साल पुराना शास्त्री ब्रिज आज इन्दौर के यातायात की दृष्टि से अत्यंत ही महत्वपूर्ण है और इस पर यातयात का दबाव भी अत्यधिक रहता है। नया ब्रिज 72 मीटर लंबा ऊंट की पीठ के आकार के ढांचे वाला बनेगा। भारतीय रेलवे के चल रहे प्रजोक्ट के तहत 139 करोड़ रुपए की लागत से इस रोड ओवर ब्रिज यानी आरओबी के लिए 139 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। रेलवे केमुताबिक पुल के नीचे दोनों और 6 मीटर चौड़ी सर्विस रोड भी निर्मित की जाएगी और जल निकासी, नई सीवर लाइन, दोनों तरफ फुटपाथ सहित आकर्षक विद्युत व्यवस्था भी रहेगी। उल्लेखनीय है कि 12 जनवरी 1953 को तत्कालीन परिवहन मंत्री लालबहादुर शास्त्री ने इस ब्रिज का लोकार्पण किया था और उन्हीं के नाम पर इसे शास्त्री ब्रिज के रूप में जाना जाता है। इस ब्रिज से ही पूर्वी इन्दौर यानी पलासिया से एमजी रोड और रीगल होते हुए पश्चिमी क्षेत्र का हिस्सा जुड़ता है। एमटीएच कम्पाउंड होते हुए राजबाड़ा के बाद आने-जाने के लिए यह शास्त्री ब्रिज ही अहम है। दूसरे पटेल ब्रिज पर यातायात का दबाव रहता है और शास्त्री ब्रिज के पुन: निर्माण के दौरान यातायात का सबसे ज्यादा दबाव पटेल ब्रिज पर ही बढ़ेगा। मौजूद ब्रिज की लम्बाई 400 मीटर है, जिसे बढ़ाकर 438 मीटर तथा ऊंचाई 4.7 मीटर से बढ़ाकर 7 मीटर की जाएगी तो ब्रिज की चौड़ाई भी डेढ़ गुना बढ़ेगी। अभी जो ब्रिज में कर्व आता है, वह भी समाप्त होगा और प्लेटफार्म की लंबाई भी बढ़ जाएगी। हालांकि इसके चलते आरएनटी मार्ग को ऊंचा करने से लेकर रीगल रोटरी सहित अन्य निर्माण भी प्रभावित होंगे। यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों नगर निगम ने अपने अवलोकन में इस ब्रिज को चूहों द्वारा भी नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई है। इसके चलते लाखों रुपए की राशि चूहों के बिलों को समाप्त करने और जहां जहां खोखला हुआ, उसकी मरम्मत पर भी खर्च की गई। हालांकि अभी सर्वे, डिजाइन, ड्राइंग तैयार होने में भी समय लगेगा। उसके बाद टेंडर की प्रक्रिया में भी 6 महीने का समय निकल जाएगा और फिर टेंडर मंजूरी, वर्क आर्डर जारी होने के बाद 15 महीने में ब्रिज के पुन: निर्माण का लक्ष्य रेलवे ने तय किया है। नया ब्रिज आर्चनुमा बनेग, जिसकी ऊंचाई वर्तमान ब्रिज से अधिक रहेगी। पहले इस ब्रिज को 6 लेन में भी बनवाने के दावे सांसद सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने किए थे। मगर रेलवे का कहना है कि मौके पर 6 लेन के लिए पर्याप्त जगह नहीं है और अधिकतम फोरलेन ही बनाया जा सकता है। अभी इन्दौर रेलवे स्टेशन का भी कायाकल्प हो रहा है। उसके बाद शास्त्री ब्रिज के पुन: निर्माण की प्रक्रिया भी अब रेलवे राशि मंजूर होने केबाद शुरू करेगा। और 72 साल पुराने शास्त्री ब्रिज को तोडक़र नए ब्रिज के निर्माण की नींव डाली जाएगी। हालांकि यह काम कब शुरू होगा, फिलहाल कोई समय सीमा या तारीख निश्चित नहीं है।
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