
इंदौर। विकाससिंह राठौर
इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर विमानतल (Indore airport) पर 4 मार्च को हुए भीषण अग्निकांड (Massive fire incident) की लपटें दिल्ली ( Delhi) तक पहुंच गई है। इस घटना को लेकर भारत सरकार (Government of India) के गृह मंत्रालय ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) से रिपोर्ट मांगी है। जिसके बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मामले की जांच शुरू की है। इसके लिए पिछले दिनों एयरपोर्ट अथॉरिटी की एक टीम दिल्ली से इंदौर भी आ चुकी है। बताया जा रहा है कि पूरे मामले की सूचना इंटेलीजेंस ब्यूरो (खुफिया विभाग) ने गृह मंत्रालय को देते हुए एयरपोर्ट की भारी लापरवाही की बात कही थी।
उल्लेखनीय है कि 4 मार्च को होली (धुलेंडी) की शाम एयरपोर्ट परिसर में अचानक आग लग गई थी। यह आग एयरपोर्ट कॉलोनी और चंदननगर की ओर बाउंड्रीवाल के पास लगी थी। इसके नजदीक ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर भी है। आग जहां लगी वो जगह रनवे से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर नॉन ऑपरेशनल एरिया में थी। यहां बड़ी और सूखी घास होने के कारण आग तेजी से फैल गई थी। थोड़ी ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया था और यहां के करीब 20 एकड़ क्षेत्र को प्रभावित किया था। एयरपोर्ट प्रबंधन ने अपनी अग्निशमन गाडिय़ों को आग बुझाने में लगाया लेकिन यह तेजी से फैल रही थी, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन को सूचना दी गई जिसके बाद नगर निगम की अग्निशमन गाडिय़ां भी यहां भेजी गई थी। 3 घंटे से ज्यादा चले अभियान के बाद आग पर काबू पाया गया था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी, खुफिया विभाग) ने गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी थी। इस पर गृह मंत्रालय ने एयरपोर्ट अथॉरिटी से इस रिपोर्ट के आधार पर जवाब मांगा है, जिस पर एयरपोर्ट अथॉरिटी के दिल्ली मुख्यालय द्वारा जांच की जा रही है।
रिपोर्ट में लापरवाही और समन्वय की कमी की बात
सूत्रों के मुताबिक एयरपोर्ट पर हुए इस अग्निकांड को लेकर इंटेलीजेंस ब्यूरो ने गृह मंत्रालय को जो रिपोर्ट भेजी है और जो प्राथमिक जांच हुई है उसमें इस घटना को लेकर एयरपोर्ट प्रबंधन की लापरवाही की बात कही गई है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि घटना के तुरंत बाद एयरपोर्ट प्रबंधन को सूचना ही नहीं थी। आग फैलने के बाद भी इसके बाद इसे हल्के में लेते हुए पहले खुद आग बुझाने की कोशिश की, जब आग भडक़ गई तब देरी से सूचना प्रशासन को दी गई, जिसके कारण बचाव कार्य के लिए निगम की अग्निशमन और बचाव गाडिय़ां देरी से पहुंची। जब गाडिय़ां एयरपोर्ट पहुंची तब भी समन्वय की कमी के कारण सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ ने समय पर गेट नहीं खोले थे, जिसके कारण और देरी हुई। आग फैलकर आसपास के रिहायशी इलाकों में भी जा सकती थी, जिससे जनहानि का खतरा था। आग कैसे लगी यह भी स्पष्ट नहीं, क्या बाहर की ओर से किसी ने जानबूझकर आग लगाने की कोशिश की थी? यह भी जांच का विषय है।
समय पर घास काटी जाती तो नहीं बढ़ती इतनी आग
घटना को लेकर एक बड़ी लापरवाही यह भी सामने आई है कि एयरपोर्ट के इस हिस्से में काफी बड़ी घास उगी हुई थी, जिसे समय पर काटा नहीं गया था। घास की ऊंचाई 8 फीट तक बढ़ चुकी थी। सूखी होने के कारण घास में तेजी से आग फैल गई। अगर घास की समय पर सफाई कटाई हो चुकी होती तो घटना इतनी बड़ी होती ही नहीं। घटना के बाद एयरपोर्ट प्रबंधन ने तुरंत घास की सफाई भी करवाई थी।
10 जेसीबी से गड्ढे कर आग को फैलने से रोका था
ाटना के समय आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि एयरपोर्ट प्रबंधन और जिला प्रशासन की अग्निशमन गाडिय़ां भी इस पर काबू नहीं कर पा रही थी। आज के फैलाव को रोकने के लिए नगर निगम की 10 जेसीबी गाडिय़ां बुलाकर आग के चारों ओर मैदान में गड्ढे किए गए थे जिससे आग और आगे ना फैले। यह उपाय काम भी आया था और आग को फैलने से रोका गया था। अगर इस समय जेसीबी गाडिय़ां नहीं होती तो आग और विकराल रूप ले सकती थी।
रिपोर्ट के आधार पर आगे हो सकती है कार्रवाई
बताया जा रहा है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा की गई जांच और इसके आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट को चेयरमैन को भेजा गया है। यहां से इस रिपोर्ट को गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट में लापरवाही की पुष्टि होने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं अगर रिपोर्ट में इंटेलीजेंस ब्यूरो की किसी बात को खारिज किया जाता है तो इस पर ब्यूरो आपत्ति भी उठा सकता है, जिस पर दोबारा जांच हो सकती है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी के दो महाप्रबंधक पहुंचे इंदौर
इंटेलीजेंस ब्यूरो द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन से जवाब मांगा था। इस पर चेयरमैन ने मामले की जांच मुंबई रीजनल हेडक्वार्टर को दी थी। इस पर मुंबई से पिछले दिनों दो महाप्रबंधक (जीएम) सहित टीम इंदौर पहुंची थी। इनमें जीएम ऑपरेशंस जॉर्ज वर्गिस और जीएम इलेक्ट्रिकल फ्रांसिस जेवियर शामिल थे। अधिकारियों ने इंदौर आकर इस घटना की पूरी पड़ताल की। टीम ने मौके का निरीक्षण किया, साथ ही बाहर से पटाखा या अन्य किसी तरह से अंदर आग लगाए जाने की संभावना पर भी विमर्श किया। इसके साथ ही इस घटना के दौरान अपनाई गई पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड और लॉग बुक भी चेक की। कब प्रशासन को सूचना दी, कब गेट खोले गए, ड्यूटी पर कौन कौन तैनात था। पूरे ऑपरेशन में शामिल टीम के बयान भी लिए गए।
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