भोपाल। राजधानी भोपाल के वार्ड-32 स्थित पीएंडटी चौराहे (P&T intersection) पर किए गए सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी (Resentment in people) बढ़ती जा रही है। यहां पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए फुटपाथ को लेकर रहवासियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि फुटपाथ के चारों ओर इतनी ऊंची लोहे की रेलिंग लगा दी गई है कि वहां पहुंचना ही मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सड़क किनारे करीब तीन फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग लगाई गई है। कई स्थानों पर पहले से बनी दीवार और नई रेलिंग मिलकर ऐसा घेरा तैयार कर रही हैं, जिससे फुटपाथ तक पहुंचना आसान नहीं रह गया है। लोगों का कहना है कि जिस सुविधा का निर्माण पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए किया गया था, वही अब उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है।
रहवासियों का आरोप है कि कई जगहों पर फुटपाथ में प्रवेश के लिए पर्याप्त गैप या रास्ते नहीं छोड़े गए हैं। नतीजतन, लोग फुटपाथ का उपयोग करने के बजाय सड़क पर चलने को मजबूर हैं। इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को फुटपाथ तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़े या रास्ता ही न मिले, तो ऐसी व्यवस्था का कोई व्यावहारिक लाभ नहीं रह जाता।
सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले यात्रियों को भी इस निर्माण के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि बस या अन्य वाहनों से उतरने के बाद सीधे फुटपाथ तक पहुंचने का रास्ता नहीं है। ऐसे में उन्हें सड़क पर ही चलना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा प्रभावित होती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर तैयार किए गए इस डिजाइन में पैदल यात्रियों की वास्तविक जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया है। उनका कहना है कि योजना बनाते समय जमीनी परिस्थितियों और आम लोगों की सुविधा का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया।
रहवासियों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि फुटपाथ तक पहुंचना ही कठिन हो जाए तो उस पर खर्च किए गए सरकारी धन का उद्देश्य क्या रह जाता है।
क्षेत्र के नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलिंग के बीच-बीच में पर्याप्त प्रवेश द्वार बनाए जाएं ताकि पैदल यात्री आसानी से फुटपाथ का उपयोग कर सकें। उनका कहना है कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन में आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए।
फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
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