
देहरादून। पंजाब (Punjab) के कुछ निहंग सिखों (Nihang Sikhs) ने विकासनगर-कुल्हाल बॉर्डर पर जमकर बवाल काटा. वे गुरुवार को जबरन उत्तराखंड (Uttarakhand) की राजधानी देहरादून (Dehradun) में घुस गए ये निहंग कर्णप्रयाग में कुछ दिन पहले हुई घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए अपने साथियों की रिहाई की मांग पर अड़े थे. गुरुवार रात करीब 8 से 9 बजे के बीच ये निहंग देहरादून के रेस कोर्स गुरुद्वारा पहुंचे. लेकिन पुलिस ने वहां पर पहले से ही नाकेबंदी कर रखी थी. समय रहते ही उनको आगे किसी भी तरह का बवाल करने से रोक लिया गया।
गुरुवार रात निहंग सिखों ने उत्तराखंड के विकासनगर-कुल्हाल बॉर्डर पर जमकर बवाल काटा. निहंग जबरन उत्तराखंड के बॉर्डर में घुसना चाहते थे. पुलिस ने उत्तराखंड और हिमाचल के कुल्हाल बॉर्डर पर भारी फोर्स तैनात की लेकिन लगातार निहंग उत्तराखंड में घुसने की जिद कर रहे थे. निहंगों का कहना था कि वह उत्तराखंड आकर उनके साथियों को कर्णप्रयाग में विवाद के बाद मारपीट जेल भेजे जाने के मामले में वहां के स्थानीय लोगों से बातचीत करना चाहते हैं।
रेस कोर्स गुरुद्वारे में रोके गए निहंग सिख
100 से ज्यादा की संख्या में हिमाचल की तरफ से उत्तराखंड में दाखिल हो रहे निहंग सिखों को पुलिस ने रोक था, लेकिन निहंग करने को तैयार नहीं थे. करीब रात 9 बजे ये निहंग देहरादून बॉर्डर में दाखिल हुए और वहां से सीधे सहसपुर, सेलाकुई होते हुए देहरादून शहर में पहुंचे. उससे पहले पुलिस ने भारी सुरक्षा बल देहरादून के प्रेम नगर क्षेत्र में तैनात किया था, लेकिन निहंग पुलिस को चकमा देकर दूसरे रास्तों से होते हुए सीधे ऋषिकेश की तरफ बढ़ने लगे. लेकिन इस दौरान पुलिस की नाकेबंदी में निहंग देहरादून के जोगीवाला में रोके गए वहां से पुलिस ने इनको देर रात 12:44 पर वापस देहरादून शहर की तरफ डायवर्ट किया. इस दौरान वे करीबन 1:30 बजे देहरादून के रेस कोर्स में एक गुरुद्वारे में पहुंचे. पुलिस ने नाकेबंदी करते हुए निहंग सिखों को रेस कोर्स गुरुद्वारे में ही रोक दिया।
गुरुद्वारे में निहंग सिखों से चली डेढ़ घंटे तक बात
इस दौरान देहरादून के जिला अधिकारी आशीष चौहान , एसएसपी परमेंद्र सिंह डोभाल, और पुलिस के आलाधिकारी मौजूद थे. लगातार 2 घंटे से ज्यादा समय तक निहंग सिखों से बातचीत हुई काफी देर तक समझने के बाद रात करीब 2:30 बजे निहंग वापस पोंटा साहिब हिमाचल लौट गए।
दरअसल निहंग 16 जून को उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में हुई घटना को लेकर काफी नाराज दिख रहे थे. उनका कहना है कि जिस तरीके से वहां विवाद और उसके बाद मारपीट हुई वह कहीं ना कहीं बेहद गलत हुआ है. अगर यह बात आपस में सुलझा दी जाती तो शायद इतना बड़ा मामला ना होता।
निहंग सिखों का कहना है कि वह कर्णप्रयाग जाकर उन स्थानीय लोगों से बातचीत करना चाहते हैं जिनके साथ झगड़ा हुआ था. उन्होंने कहा कि इस मारपीट में हमारे लोगों की कोई गलती नहीं थी, लेकिन अब यह घटना हो चुकी है तो ऐसे में वे सभी विनती करते हैं और सभी से बातचीत के जरिए मामला हल करना चाहते हैं. लेकिन जिस तरीके से निहंग उत्तराखंड के बॉर्डर में घुसे और वहां जिस तरीके से पुलिस बैरिकेड को तोड़ा और तलवारे हवा में लहराई उसे जरूर माहौल तनाव पूर्ण हो गया था. लेकिन पुलिस और प्रशासन ने बातचीत के जरिए यह पूरा मामला शांत करवाया. हालांकि अभी मामला शांत है लेकिन पोंटा साहिब हिमाचल में निहंग जत्थे जरूर गुरुद्वारे में पहुंचे हैं।
क्या है निहंग सिखों की मांग?
पूरा विवाद 16 जून की घटना से जुड़ा है. जब कर्णप्रयाग में स्थानीय लोगों और निहंग सिखों के बीच हुए मामूली विवाद में कथित तौर पर तलवार से किए गए हमले में कुछ लोग घायल हो गए थे. इस घटना में एक निहंग सिख भी घायल हो गया था. इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर चार निहंग सिखों को अरेस्ट किया था. इस घटना के बाद 20 जून की दोपहर निहंग सिख एक सिख श्रद्धालु को बंधक बनाकर नगरासू स्थित गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए. ये गतिरोध 23 जून को खत्म हो गया था और छत पर चढ़े निहंग भी नीचे उतर आए थे. लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ. निहंगों का एक जत्था गुरुवार को मोहाली के गुरुद्वारा सिंह शहीदान से उत्तराखंड की ओर कूच कर गया. उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें हिमाचल-उत्तराखंड बॉर्डर पर रोकने की कोशिश की लेकिन वे बेरिकेड्स तोड़कर देहरादून में घुस गए. हालांकि उनको समझाकर वापस भेज दिया गया।
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