वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान (The United States and Iran) के बीच तनाव कुछ कम होने के संकेतों के बीच तेहरान ने घोषणा की है कि भविष्य में होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लिया जाएगा। हालांकि ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि उसके मित्र देशों को इस व्यवस्था में विशेष रियायत दी जा सकती है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत को भी यह शुल्क देना होगा या उसे छूट मिल सकती है।
चीन की राजधानी बीजिंग में आयोजित वर्ल्ड पीस फोरम के दौरान चीन में ईरान के राजदूत अब्दोलरेजा रहमानी फाजली ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का एक हिस्सा ईरान के क्षेत्रीय जल में आता है, इसलिए वहां से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लिया जाना स्वाभाविक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे पारंपरिक टोल टैक्स के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन देशों ने कठिन समय में ईरान का साथ दिया है, उनके लिए विशेष व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।
ईरान ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि शुल्क वसूली की प्रक्रिया क्या होगी, किन देशों पर यह लागू होगी और किन्हें छूट मिलेगी। हालांकि भारत के साथ ईरान के पारंपरिक मैत्रीपूर्ण संबंधों को देखते हुए माना जा रहा है कि नई दिल्ली को विशेष राहत मिल सकती है।
इससे पहले भी जब क्षेत्रीय तनाव के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, तब ईरान ने भारतीय जहाजों को आवागमन की अनुमति दी थी। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है।
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने अप्रैल में कहा था कि भारतीय जहाजों से किसी प्रकार का टोल नहीं लिया जा रहा है। उनका कहना था कि भारत और ईरान के संबंध भरोसे और पारस्परिक हितों पर आधारित हैं तथा भारत ने हमेशा एक विश्वसनीय साझेदार की भूमिका निभाई है।
इसी पृष्ठभूमि में माना जा रहा है कि यदि ईरान शुल्क व्यवस्था लागू करता भी है, तो भारत को मित्र देशों की श्रेणी में रखते हुए रियायत या छूट दी जा सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर निर्यात होने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यदि ईरान शुल्क लागू करता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लागत और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि शुल्क की दरें क्या होंगी और किन देशों या जहाजों पर यह लागू किया जाएगा।
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