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इंदौर के खजराना में 6 साल में नहीं बना अस्पताल, कागजों में चलती रहीं 87 डॉक्टर-नर्स की ट्रांसफर-पोस्टिंग

July 07, 2026

इंदौर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर जिले (Indore district) से सरकारी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। खजराना क्षेत्र (Khajrana) में छह वर्ष पहले 100 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल (Civil Hospital) की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन आज तक अस्पताल का भवन तैयार नहीं हो सका। इसके बावजूद अस्पताल के नाम पर 87 पद स्वीकृत हुए और वर्षों तक डॉक्टरों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्तियां तथा तबादले होते रहे।

जानकारी के अनुसार, 23 जून 2020 को खजराना में 100 बेड के सिविल अस्पताल की मंजूरी दी गई थी। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों सहित कुल 87 पद स्वीकृत किए गए थे। हालांकि छह साल बीतने के बाद भी अस्पताल के लिए भूमि आवंटित नहीं हो सकी और निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।

भवन नहीं बना, फिर भी होती रहीं पोस्टिंग
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पताल का अस्तित्व केवल कागजों तक सीमित था, तब उसके नाम पर कर्मचारियों की पदस्थापना और तबादले कैसे किए जाते रहे। जानकारी के मुताबिक, 15 जून 2026 को भी एक लैब टेक्नीशियन की पदस्थापना सिविल अस्पताल, खजराना के नाम पर की गई।


  • स्वास्थ्य विभाग ने बताई वजह
    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसानी ने कहा कि शहरी क्षेत्र में सरकारी जमीन उपलब्ध कराना आसान नहीं है। इसी कारण अस्पताल भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि अस्पताल के लिए स्वीकृत नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को फिलहाल शहर के संजीवनी क्लीनिकों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं देने के लिए तैनात किया गया है।

    स्वास्थ्य मंत्री बोले- पोर्टल बंद किया गया
    उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि संबंधित स्थान पर पहले अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर (UPHC) था, जिसे बाद में सिविल अस्पताल के रूप में अपग्रेड किया गया। लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण भवन का निर्माण नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि अस्पताल का नाम विभागीय पोर्टल पर दर्ज रहने की वजह से नियुक्तियों और तबादलों की प्रक्रिया जारी रही। अब ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए संबंधित पोर्टल बंद कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

    कांग्रेस ने उठाए सवाल
    इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने इसे बड़ा प्रशासनिक घोटाला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का निर्माण हुए बिना कर्मचारियों की नियुक्तियां और तबादले होना गंभीर मामला है और कांग्रेस आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी।

    तीन लाख से अधिक आबादी प्रभावित
    फिलहाल इस अस्पताल के लिए स्वीकृत स्टाफ पीसी सेठी अस्पताल, हुकुमचंद अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दे रहा है। वहीं खजराना, मुसाखेड़ी, तेजाजी नगर, बिचौली हप्सी और आसपास के तीन लाख से अधिक लोगों को आज भी इलाज के लिए एमवाय अस्पताल, एमटीएच और जिला अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। यदि समय पर सिविल अस्पताल का निर्माण पूरा हो जाता, तो इन अस्पतालों पर मरीजों का दबाव काफी हद तक कम हो सकता था।

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