नई दिल्ली। भारतीय मूल के अमेरिकी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव (Gaurav Srivastava) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उन्होंने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA से जुड़ा अधिकारी बताकर इंडोनेशिया के शीर्ष नेताओं और रक्षा प्रतिष्ठान में प्रभाव बनाया। रिपोर्ट के अनुसार, इसी कथित प्रभाव के आधार पर उनसे जुड़ी कंपनियों को अरबों डॉलर के रक्षा सौदों से जुड़े लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) मिले।
OCCRP की जांच के अनुसार, गौरव श्रीवास्तव ने खुद को CIA से जुड़ा बताते हुए इंडोनेशिया के वरिष्ठ अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक नेतृत्व के बीच मजबूत नेटवर्क तैयार किया। रिपोर्ट में दावा है कि उनकी पहुंच तत्कालीन रक्षा मंत्री और बाद में राष्ट्रपति बने प्रबोवो सुबियांतो तक हो गई थी। इसी दौरान उन्होंने कई उच्चस्तरीय बैठकों में भी हिस्सा लिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे मामले की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब श्रीवास्तव के एक पूर्व कारोबारी साझेदार ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया। मुकदमे में आरोप लगाया गया कि श्रीवास्तव ने खुद को CIA से जुड़ा बताकर विदेशी अधिकारियों का विश्वास हासिल किया और इसी आधार पर व्यावसायिक लाभ प्राप्त किए।
मुकदमे में यह दावा भी किया गया कि उन्होंने वर्ष 2002 के बाली बम विस्फोट मामले में सहयोग करने और प्रबोवो सुबियांतो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन ब्लैकलिस्ट से हटवाने जैसे दावे किए थे।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के बीच श्रीवास्तव से जुड़ी पांच कंपनियों को इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय से पांच लेटर ऑफ इंटेंट प्राप्त हुए। इन प्रस्तावित रक्षा सौदों का कुल मूल्य 13 अरब डॉलर से अधिक बताया गया है।
इनमें 36 F-15 लड़ाकू विमान, UH-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर, C-130 परिवहन विमान और सैन्य कमांड एवं रक्षा प्रणालियों से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल बताए गए हैं।
OCCRP की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि श्रीवास्तव से जुड़ी पांच कंपनियों में से चार के पास रक्षा क्षेत्र का कोई उल्लेखनीय अनुभव नहीं था और उन्हें कथित तौर पर संदिग्ध या निष्क्रिय कंपनियों के रूप में चिन्हित किया गया। इसी आधार पर इन रक्षा सौदों को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।
अमेरिका में दायर मुकदमे और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहे हैं कि यदि आरोप सही हैं तो गौरव श्रीवास्तव इतने लंबे समय तक प्रभावशाली लोगों का विश्वास कैसे जीतते रहे। साथ ही यह भी जांच का विषय बना हुआ है कि कथित तौर पर उन्होंने सरकारी और रक्षा तंत्र तक अपनी पहुंच किस तरह बनाई।
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