
नई दिल्ली । भारत और थाईलैंड(India and Thailand) के बीच सांस्कृतिक तथा व्यापारिक(Cultural and trade relations between) संबंध आधुनिक दौर तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें करीब दो हजार वर्ष पुरानी हैं। इसका ताजा प्रमाण थाईलैंड(Thailand) में हुई एक पुरातात्विक खुदाई(scientists discovered)से मिला है, जहां वैज्ञानिकों को दो सोने की प्राचीन अंगूठियां मिली हैं। इनमें से एक अंगूठी पर भारतीय ब्राह्मी लिपि में अंकित शब्दों ने इतिहासकारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज प्राचीन भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मजबूत व्यापारिक संपर्क का महत्वपूर्ण साक्ष्य है।
यह खोज थाईलैंड के पेत्चाबुरी प्रांत स्थित दोन याई थोंग पुरातात्विक स्थल पर हुई। थाईलैंड के फाइन आर्ट्स डिपार्टमेंट के अनुसार यहां मानव कंकालों की खुदाई के दौरान ये अंगूठियां मिलीं। प्रारंभिक अध्ययन में पता चला कि इनका संबंध लगभग 2,000 वर्ष पुराने आयरन एज काल से हो सकता है।
ब्राह्मी लिपि में मिला अहम संदेश
विशेषज्ञों ने एक अंगूठी पर अंकित ब्राह्मी लिपि को पढ़ने की कोशिश की, जिसमें ‘पुस रखितस’ लिखा मिला। इसका अर्थ बताया गया है- “वह व्यक्ति जिसे पुष्य का संरक्षण प्राप्त है।” भारतीय परंपरा में पुष्य नक्षत्र को अत्यंत शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। दूसरी अंगूठी पर कोई लेख नहीं मिला, लेकिन दोनों आभूषणों की बनावट और शैली भारतीय प्रभाव की ओर संकेत करती है।
भारतीय व्यापारी से जुड़ा हो सकता है संबंध
पुरातत्वविदों का मानना है कि ये अंगूठियां किसी संपन्न भारतीय व्यापारी की हो सकती हैं, जो समुद्री व्यापार के जरिए उस समय थाईलैंड पहुंचा होगा। उस दौर में भारत के व्यापारी मसाले, वस्त्र, धातु, आभूषण और अन्य वस्तुओं का व्यापार दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से करते थे। यही कारण है कि थाईलैंड सहित कई क्षेत्रों में भारतीय संस्कृति, भाषा और धार्मिक प्रभाव के प्रमाण समय-समय पर मिलते रहे हैं।
धान के खेत से शुरू हुई बड़ी खोज
इस ऐतिहासिक स्थल की पहचान तब हुई जब स्थानीय ग्रामीणों को धान के खेत में प्राचीन वस्तुएं मिलीं। इसके बाद सरकार ने यहां वैज्ञानिक खुदाई शुरू कराई। फरवरी से अब तक यहां से आठ मानव कंकाल, सोने और कांसे के आभूषण, मिट्टी के बर्तन और कई अन्य प्राचीन वस्तुएं बरामद हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि खुदाई पूरी होने के बाद इन सभी अवशेषों को संग्रहालय में आम लोगों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।
राखीगढ़ी पर भी बढ़ी उम्मीदें
उधर भारत में भी सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े स्थलों में शामिल राखीगढ़ी को लेकर शोध तेज हो गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने वहां से मिले मानव कंकालों को वैज्ञानिक और डीएनए विश्लेषण के लिए भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण को सौंपा है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इन अध्ययनों से प्राचीन भारतीय सभ्यता, लोगों की जीवनशैली और आनुवंशिक इतिहास से जुड़े कई नए तथ्य सामने आएंगे। थाईलैंड में मिली यह नई खोज एक बार फिर साबित करती है कि प्राचीन भारत का व्यापारिक और सांस्कृतिक प्रभाव समुद्री मार्गों के जरिए हजारों किलोमीटर दूर तक फैला हुआ था।
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