
नई दिल्ली । देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एसवाई कुरैशी (S.Y. Quraishi) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के साथ साल 2022 में हुई अपनी बहुचर्चित मुलाकात को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। कुरैशी ने बताया कि जब वह संघ प्रमुख से मिलने पहुंचे तो उस दौरान हेट स्पीच को लेकर उनसे गहन चर्चा हुई था। कुरैशी का दावा है कि उस मुलाकात के दौरान मोहन भागवत ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा था, “मुसलमानों के बिना हिंदू राष्ट्र की हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।”
अपनी नई किताब “इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट अ मेमॉयर” के विमोचन से पहले मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कुरैशी ने इस ऐतिहासिक बैठक के बारे में विस्तार से चर्चा की है। इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी के साथ दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, वरिष्ठ पत्रकार शाहिद सिद्दीकी, उद्योगपति सईद शेरवानी और सेना के पूर्व उप-प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर) जमीर उद्दीन शाह शामिल थे।
सरकार के बजाय आरएसएस के पास जाने की आलोचना पर जवाब देते हुए कुरैशी ने कहा, “हमने यह आलोचना कई बार सुनी है। हम निश्चित रूप से सरकार के साथ भी बातचीत करना पसंद करते। लेकिन हमने सोचा कि हम सीधे इस नफरती विमर्श के मुख्य स्रोत के पास जाएंगे। हमारे अनुसार यह पूरा नफरती नैरेटिव आरएसएस द्वारा फैलाया जा रहा था। इसलिए हमने सोचा कि हम सीधे प्रमुख के पास जाएं और कहें कि देश में जो लिंचिंग, अभद्र भाषा और ध्रुवीकरण हो रहा है, वह बहुत दुखद है और इससे देश का माहौल प्रदूषित हो रहा है।”
एसवाई कुरैशी 30 जुलाई 2010 से 10 जून 2012 तक देश के मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि भागवत ने उन्हें आमंत्रित नहीं किया था, बल्कि उन्होंने खुद समय मांगा था और संघ प्रमुख ने दो-तीन सप्ताह के भीतर दिल्ली में मुलाकात का समय दे दिया था।
संविधान बदलने की कोई योजना नहीं: संघ प्रमुख
एसवाई कुरैशी ने याद करते हुए दावा किया कि जब उन्होंने मोहन भागवत से पूछा कि आपके हिंदू राष्ट्र में मुसलमानों का भविष्य क्या होगा? तो भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत हिंदू राष्ट्र हमेशा से था, आज भी है और हमेशा रहेगा। कुरैशी के अनुसार, भागवत का यह कहना बेहद आश्वस्त करने वाला था कि वे मुसलमानों के बिना हिंदू राष्ट्र की कल्पना नहीं कर सकते। इसके साथ ही भागवत ने एक और बड़ी बात कही कि वे देश का संविधान बदलने की कोई योजना नहीं बना रहे हैं। कुरैशी ने कहा, “और वे ऐसा करेंगे भी क्यों? क्योंकि वे इसी संविधान के दायरे में रहते हुए वह सब कुछ हासिल कर रहे हैं जो वे करना चाहते थे। भागवत के अनुसार, उन्होंने इसी संविधान के भीतर हिंदू राष्ट्र स्थापित कर लिया है।”
मोहन भागवत की शिकायतें
बैठक के दौरान आरएसएस प्रमुख ने भी मुस्लिम प्रतिनिधिमंडल के सामने हिंदुओं की ओर से कुछ शिकायतें रखीं। भागवत ने कहा कि हिंदुओं को गोहत्या और बीफ खाना पसंद नहीं है। साथ ही उन्हें मुसलमानों द्वारा हिंदुओं को काफिर कहे जाने पर भी आपत्ति है। इस पर प्रतिनिधिमंडल ने भागवत से कहा, “आपने दो-तीन राज्यों को छोड़कर पूरे देश में गोहत्या पर पहले ही प्रतिबंध लगा रखा है। अब इस प्रतिबंध को पूरे देश में लागू करना आपके हाथ में है। आपकी सरकार चल रही है, आप सरकार से इसे पूरी तरह लागू करने के लिए कहें।”
काफिर शब्द पर प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह कोई गाली नहीं है, बल्कि यह एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ गैर-विश्वासी होता है। हालांकि, उन्होंने भागवत से कहा कि अगर हिंदुओं को यह शब्द अपमानजनक लगता है, तो मुसलमानों को इसका इस्तेमाल करने से बचना चाहिए और वे दूसरों को भी ऐसा न करने के लिए कहेंगे।
मुस्लिम नेताओं ने भी जवाबी शिकायत करते हुए कहा कि बात-बात पर मुसलमानों को पाकिस्तानी और जिहादी कहा जाता है, जो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं है। इस पर मोहन भागवत सहमत हुए कि यह पूरी तरह गलत है और वे अपने लोगों से ऐसा न करने के लिए कहेंगे।
संवाद ही आगे का एकमात्र रास्ता
कुरैशी ने अपनी किताब के एक चैप्टर ‘द डे वी मेट मोहन भागवत’ में लिखा है कि इस मुलाकात के बाद से अब तक उनकी संघ प्रमुख के साथ तीन और बैठकें हो चुकी हैं। हर बैठक में भागवत इसी बात को दोहराते हैं कि संविधान सर्वोपरि है, मुसलमान भारत के हैं और एक सदी से बने हिंदू-मुस्लिम तनाव को रातोंरात हल नहीं किया जा सकता, इसके लिए सभी पक्षों को धैर्य रखना होगा।
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