
उज्जैन। एक समय था जब पुलिस के मुखबिर लोग अपनी जान जोखिम में डाल कर पुलिस की मदद करते थे। इसके चलते बड़ी-बड़ी वारदातों का चंद घंटों में ही खुलासा हो जाता था, लेकिन कुछ वर्षों से उज्जैन पुलिस का मुखबिरों से संपर्क टूट गया है।
ऐसे में मोबाइल व सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के भरोसे ही पुलिसिंग की जा रही है। मगर, जिन मामलों में बदमाशों ने मोबाइल का उपयोग नहीं किया या फिर उसके सीसीटीवी कैमरों के फुटेज नहीं मिले, पुलिस उनका महीनों बाद भी खुलासा नहीं कर पा रही है। उल्लेखनीय है कि शहर व आसपास आपराधिक घटनाएँ बढ़ गई हैं। अपराधी हर दिन कहीं न कहीं घटना को अंजाम देकर खुलेआम चुनौती दे रहे हैं और पुलिस उन्हें पकड़ पाने में असफल हो रही है। घटना की पूर्व जानकारी दे सकें, पुलिस के पास ऐसे मुखबिर नहीं हैं और जो हैं उनका भरोसा अफसरों पर नहीं रहा। पुलिस के कमजोर सूचना तंत्र के कारण शहर में कई केस आज भी अनसुलझे हैं। पहले मुखबिर पुलिस के लिए जान जोखिम में डाल कर काम करते थे। इससे पुलिस को पहले ही कई मामले की जानकारी हो जाती थी और बड़ी-बड़ी घटनाएँ टल जाती थीं या चंद दिनों में खुलासा हो जाता था। अपराधी पकड़े जाते थे।
इसलिए दूर होते गए मुखबिर
नाम नहीं छापने की शर्त पर पुलिस के एक मुखबिर ने बताया कि उज्जैन पुलिस ने भरोसा खो दिया है। वे अफसरों के लिए काम करते हैं तो अपराधियों से जान का खतरा रहता है और इससे दूर होने की कोशिश करते हैं तो फर्जी मामलों में फंसाकर पुलिस जेल भेज देती है। ऐसी स्थिति में दो पाटों के बीच पिसना पड़ता है। पुलिस के लिए हमने कई वर्षों तक काम किया। कई बड़ी घटनाओं का खुलासा कराया, लेकिन इसके बाद पुलिस हमारे लिए बेरहम साबित हुई। झूठे मामलों में पुलिस ने हमें ही जेल भेज दिया। रोजी-रोटी के लिए मोहताज हो गए। परिवार बिखरने की नौबत आ गई।
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