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यह गूंज भी इतनी खामोशी से चीखी कि पूरा देश हिला दिया… गुरूर था ताकत का… डर के बवंडर ने मिटा दिया

July 23, 2026

उनकी ताकत को कम हांका… अपनी गलतियों को ढांका… सिस्टम के गिरेबां में नहीं झांका और देश में विरोध की एक ऐसी ताकत को जन्म दे दिया, जो राजनीति नहीं जानती, लेकिन सत्ता को हिलाने की ताकत रखती है… जिसे बहलाना, फुसलाना, झूठ की चकाचौंध में डुबाना और जो कहे उसे मान लेने के लिए दबाना नामुमकिन है… यह छात्र आंदोलन नहीं विरोध की एकजुटता है…यह चुनौती है उन खरीदे हुए चैनलों और बिके हुए पत्रकारों को, जो आईने में अपने चेहरे दिखाते हैं और देश को उंगली पकडक़र चलाने का दावा करते नजर आते हैं… यह चुनौती है उन नेताओं को, जो सत्ता को जागीर मानते हैं… मतदाताओं को मुट्ठी में रखने का भ्रम पालते हैं और चुनाव जीतने-भर को सत्ता की ताकत मानते हैं… यह न बूढ़े हैं न बच्चे हैं… न निराश हैं न हताश हैं… न जिंदगी को बोझ मानते हैं और न ही लड़ाई से दूर भागते हैं… यह वो हैं, जो अपने भविष्य से पहले देश के वर्तमान को सुधारना चाहते हैं… ये वो हैं, जो बिना किसी आवाज के एकजुट हो जाते हैं… लाठियां खाते हैं… जेल जाते हैं और देश को जगाते हैं… ऐसा लगता है कि वो किसी आजादी की जंग लड़ रहे हैं और किसी गांधी, किसी सुभाष, किसी भगतसिंह और आजाद को ढूंढ रहे हैं… इसी खोज में उन्हें एक ऐसी आवाज मिल गई, जो खामोश रहकर बात कर रही थी… आमरण अनशन कर अधिकारों की लड़ाई को जीवन देने वाले सोनम वांगचुक की इस आवाज के साथ ऐसा काफिला चल पड़ा, जिसे तूफान कहते हैं… दिल्ली से निकलकर देश के हर शहर में पढऩे वाले छात्र सरकार को सबक सिखाने सडक़ों पर उतर आए… सरकार चूक गई… बात छोटी-सी थी…शिक्षा मंत्री का इस्तीफा यदि जख्मी छात्रों का मरहम बन सकता था तो जायज-नाजायज के तर्क में डूबना नादानी थी… छोटी-सी बात को नाक का बाल बनाकर जो बवाल सरकार ने पैदा किया है, उसे मिटाना या दबाना इतना आसान नहीं रहेगा, क्योंकि यह आज-भर का बवाल नहीं है, बल्कि इस देश के लोगों की उस ताकत का अहसास है, जो अब तक हर हिमाकत को स्वीकार कर दबती रही… फिर चाहे वो बेरोजगारी हो, महंगाई हो, करों की मार हो या सत्ता का प्रहार हो…अब तक सरकार के पास स्वयं की ताकत और आवाज पहुंचाने के लिए मीडिया की मंडी थी, लेकिन अब जनता को अपनी आवाज देशभर में गुंजाने के लिए सोशल मीडिया का वो जरिया मिल गया है, जो एक आवाज पर देश को इकट्ठा कर सकता है… सरकार को झुका सकता है…विरोध को गुंजा सकता है…यह न तो कोई दल है और न राजनीतिक महत्वांकांक्षा पर सत्ता की आकांक्षा का आसक्त समूह…यह देश का वह युवा है, जिसका सम्मान भी करना पड़ेगा और स्वीकार भी करना पड़ेगा, वरना हर व्यक्ति गांधी बन जाएगा और हर दिन आंधी लाएगा… अब भी समय है… प्रहार नहीं, स्वीकार करें… नाक का बाल नहीं… भाल का तिलक बनाएं… नैतिकता के नाते ही सही… शिक्षा मंत्री खुद इस्तीफा देकर इस बवंडर को मिटाएं… वरना छात्रों की आग पर विरोधी रोटियां सेंकते रहेंगे… सरकार को तानाशाह कहेंगे… और खुद दयावान बनेंगे…


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  • जंतर-मंतर बने भंवरकुआं चौराहे पर छात्रों के आंदोलन को कुचलने का प्रयास, भोजन-पानी देने वालों को पुलिस ने बुलाया

    Thu Jul 23 , 2026
    दिग्गी-पटवारी पहुंचे प्रदर्शनकारियों के बीच इंदौर। दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar Mantar) की तरह इंदौर (Indore) के भंवरकुआं चौराहे (Bhanwarkuan Intersection) पर आंदोलन कर रहे छात्रों (students) को परेशान करने का सिलसिला शुरू हो गया है। पुलिस द्वारा इन छात्रों को भोजन-पानी पहुंचाने वाले लडक़ों की धरपकड़ की गई। इस पर कांग्रेस ने चेतावनी दी है […]
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