
इंदौर। जनगणना (Census) के प्रथम चरण (First Phase) में की गई मकान गणना (House listing) में सामने आए आंकड़ों के आधार पर अब नगर निगम (Municipal council) द्वारा टैक्स चोरी करने वालों को पकडऩे की कसरत आज से शुरू की जा रही है। निगम के सभी 22 जोनल कार्यालय के क्षेत्र में आज से इस आंकड़े की मैदानी पुष्टि का अभियान शुरू किया जा रहा है।
भारत सरकार के निर्देश पर जिला निर्वाचन कार्यालय के अंतर्गत जनगणना का अभियान चलाया गया। इस अभियान के पहले चरण में मकान की गणना का कार्य किया गया। यह कार्य पूर्ण होने के साथ इसकी रिपोर्ट भी भारत सरकार तक भेजी जा चुकी है। राज्य सरकार द्वारा पिछले दिनों सभी स्थानीय निकाय को निर्देश दिया गया कि जनगणना के प्रथम चरण की मकान गणना में जो आंकड़े सामने आए हैं उन आंकड़ों का अपने संपत्ति कर के आंकड़ों के साथ तुलनात्मक अध्ययन किया जाए। इसके साथ ही सरकार द्वारा यह भी निर्देश दिया गया कि जनगणना के आंकड़ों को केंद्र में रखते हुए स्थानीय निकाय द्वारा इसकी जांच की जाए। इससे स्थानीय निकाय का टैक्स नहीं देने वाले मकान की पहचान हो सकेगी। सरकार द्वारा दिए गए इस आदेश के परिणामस्वरूप आज से इंदौर में मकान गणना के आंकड़ों के आधार पर संपत्ति कर की चोरी करने वाले भवन चिह्नित करने का कार्य शुरू किया जा रहा है। निगम के अपर आयुक्त आकाश सिंह ने बताया कि इंदौर के सभी 22 जोनल कार्यालय के क्षेत्र के सहायक राजस्व अधिकारी आज से अपने-अपने जोनल कार्यालय के क्षेत्र में जांच का कार्य शुरू करेंगे। मकान गणना में मकान नंबर के साथ मकान के मालिक का नाम भी आ गया है। अब मौके पर जाकर यह देखा जाएगा कि संबंधित मकान के मालिक द्वारा संपत्ति कर दिया जा रहा है या नहीं दिया जा रहा है। यदि उक्त मकान का संपत्ति कर देने का खाता नगर निगम में नहीं खुला होगा तो ऐसे मकानों को चिह्नित करते हुए उनका खाता खोला जाएगा। यदि मकान का खाता खुला हुआ है और मकान मालिक द्वारा संपत्ति कर नहीं दिया जा रहा है तो ऐसे मकान मालिक से संपत्ति कर की वसूली का काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बहुत से लोगों द्वारा नगर निगम में प्लाट बताते हुए संपत्ति कर दिया जाता है। जनगणना के प्रथम चरण के आंकड़े में यह स्पष्ट हो गया है कि कहां पर मकान है और कहां पर मकान नहीं है। ऐसे में जिन स्थानों का प्लाट के रूप में संपत्ति कर मिल रहा है और जनगणना के आंकड़े में वहां पर मकान पाया गया है तो निगम की टीम द्वारा मौके पर जाकर ऐसी संपत्ति को अलग से चिह्नित किया जाएगा और उनके संपत्ति कर के खाते को संशोधित किया जाएगा।
भोपाल ने कर दिया काम
जनगणना के आंकड़े के आधार पर संपत्ति कर की चोरी पकडऩे के काम की शुरुआत भोपाल नगर निगम द्वारा कर दी गई है। वहां पर अब तक की जांच में नगर निगम द्वारा 1.82 लाख नए खाते उजागर किए गए हैं। वहां कई इलाकों में संपत्ति कर भरने वाले मकानों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है। भोपाल द्वारा लिखी गई सफलता की यह कहानी अब इंदौर में नगर निगम द्वारा दोहराने की तैयारी की जा रही है।
1 लाख मकानों का अंतर
जनगणना में इंदौर नगर निगम की सीमा में 854178 मकान पाए गए हैं। इंदौर नगर निगम के पास कुल 7.5 लाख संपत्ति कर के खाते हैं। इस तरह मोटे तौर पर देखा जाए तो एक लाख मकान ऐसे हैं, जिनके संपत्ति कर के खाते नहीं हैं। जनगणना की मकान गणना में यह तथ्य भी सामने आया है कि इनमें से 22470 मकानों में आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह की गतिविधियों का संचालन हो रहा है, जबकि 13153 मकानों में केवल व्यावसायिक गतिविधि का संचालन हो रहा है।
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