
इंदौर। एक परिवार ने अपने सबसे बड़े दु:ख को कई लोगों के लिए जीवन की उम्मीद में बदल दिया। खजूरी बाजार निवासी 25 वर्षीय गौरव दवे की ब्रेन डेथ के बाद सोमवार सुबह इंदौर में 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। उनके हृदय को तय समय में एयरपोर्ट पहुंचाकर सुबह 8.36 बजे इंडिगो की फ्लाइट (6ई-7174) से अहमदाबाद रवाना किया गया, जहां यूएन मेहता हॉस्पिटल में जरूरतमंद मरीज का हृदय प्रत्यारोपण किया जाएगा।
गौरव को 13 जुलाई को गंभीर ब्रेन हेमरेज के बाद राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। कई दिनों तक चले इलाज के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और चिकित्सकों ने ब्रेन डेथ घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार ने अंगदान का साहसिक निर्णय लिया। गौरव फिल्म कास्टिंग को-ऑर्डिनेटर के रूप में कार्यरत थे। परिजनों के अनुसार गौरव की बहन वैदेही राठी, बहनोई पलकेश राठी और भाई रितिक चावरे ने माता-पिता सतीश दवे और कविता दवे को अंगदान के लिए प्रेरित किया। परिवार की सहमति मिलने के बाद मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट के सहयोग से पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

दो ग्रीन कॉरिडोर बने
सुबह सबसे पहले राजश्री अपोलो हॉस्पिटल से एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जिसके जरिए हृदय को निर्धारित समय में एयरपोर्ट पहुंचाया गया। इसके बाद दूसरा ग्रीन कॉरिडोर बनाकर दोनों किडनियां चोइथराम हॉस्पिटल पहुंचाई गईं। वहीं गौरव का लिवर राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती एक मरीज को प्रत्यारोपित किया जाएगा।
अन्य अंग भी देंगे लोगों को जीवनदान
विशेषज्ञों के अनुसार फेफड़े, हार्ट वॉल्व, पेनक्रियाज और छोटी आंत के उपयोग की प्रक्रिया भी राषट्रीय स्तर पर तय प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी की जा रही है। अंग प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया राजश्री अपोलो हॉस्पिटल की मेडिकल टीम और राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (एसओटीटीओ) के समन्वय से संपन्न हुई।
68वें ग्रीन कॉरिडोर की खास बातें
– ब्रेन डेथ का पहला प्रमाणन सुबह 7.27 बजे और दूसरा शाम 4.28 बजे हुआ।
– गौरव दवे का दिल अहमदाबाद के यूएन मेहता हॉस्पिटल में 28 वर्षीय मरीज को प्रत्यारोपित किया गया।
– लिवर इंदौर के 42 वर्षीय मरीज को राजश्री अपोलो हॉस्पिटल में प्रत्यारोपित किया गया।
– दोनों किडनियां चोइथराम हॉस्पिटल में 22 और 52 वर्षीय महिला मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं।
– अहमदाबाद से डॉ. कार्तिक पटेल के नेतृत्व में 10 सदस्यीय हार्ट ट्रांसप्लांट टीम सुबह 4.20 बजे इंदौर पहुंची।
– फेफड़े चेन्नई भेजे जाने थे, लेकिन लॉजिस्टिक व्यवस्था नहीं होने से अंतिम समय में प्रत्यारोपण स्थगित करना पड़ा।
– पहला ग्रीन कॉरिडोर सुबह 8.02 बजे अपोलो हॉस्पिटल से एयरपोर्ट तक 13 मिनट में पूरा हुआ।
– दूसरा ग्रीन कॉरिडोर सुबह 9.15 बजे अपोलो हॉस्पिटल से चोइथराम हॉस्पिटल तक 16 मिनट में पूरा हुआ।
– अंगदाता गौरव दवे को गार्ड ऑफ ऑनर और पुष्पवर्षा के साथ अंतिम विदाई दी गई।
– पूरी प्रक्रिया के दौरान इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर को सुचारु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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