नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान की सेना और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी एक बार फिर खुलकर सामने आई है। जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन लीग (JAAC) के बैनर तले आयोजित एक रैली में संगठन के नेताओं ने सेना की भूमिका, राजनीतिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों को लेकर तीखे सवाल उठाए।
रावलकोट के फारूक-ए-आजम चौक पर आयोजित सभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान JAAC के प्रमुख सरदार अमन खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में नागरिक मामलों पर सेना का प्रभाव लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सेना को जनता के समर्थन पर भरोसा है, तो उसे राजनीतिक प्रभाव से अलग होकर आम लोगों के बीच आना चाहिए।
नागरिक शासन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग
रैली को संबोधित करते हुए अमन खान ने कहा कि PoK के लोगों को अपने प्रशासन और राजनीतिक फैसलों में पर्याप्त भागीदारी नहीं मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय नेतृत्व के बजाय बाहरी प्रभाव के आधार पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व तय किया जाता है, जिससे क्षेत्र के लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय नागरिक शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा।
JAAC नेतृत्व ने पाकिस्तान की चुनावी व्यवस्था और सेना की भूमिका पर भी सवाल उठाए। संगठन का आरोप है कि राजनीतिक प्रक्रिया में सैन्य प्रभाव बना हुआ है और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित होती है। हालांकि, इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से इस रिपोर्ट के संदर्भ में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आर्थिक असमानता पर भी उठे सवाल
सभा में वक्ताओं ने देश में बढ़ती आर्थिक विषमता का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि आम नागरिक लगातार महंगाई और करों का बोझ उठा रहे हैं, जबकि सत्ता और प्रभावशाली वर्ग विशेष सुविधाओं का लाभ ले रहा है। उन्होंने संसाधनों के अधिक न्यायसंगत वितरण और आम लोगों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।
न्यायपालिका और प्रशासन पर भी टिप्पणी
रैली के दौरान वक्ताओं ने न्यायिक व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे की भी आलोचना की। उनका आरोप था कि आम नागरिकों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में संस्थाएं प्रभावी भूमिका नहीं निभा रही हैं।
लंबे समय से जारी है आंदोलन
PoK में पिछले कई महीनों से विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी है। शुरुआत बिजली दरों और महंगाई जैसे आर्थिक मुद्दों से हुई थी, लेकिन समय के साथ इसमें राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रशासनिक अधिकार और नागरिक शासन की मांगें भी शामिल हो गईं।
पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां JAAC की गतिविधियों को लेकर पहले भी कड़ा रुख अपनाती रही हैं। वहीं, आंदोलनकारी संगठन अपने विरोध को नागरिक अधिकारों और स्थानीय हितों से जुड़ा बताते हैं।
फिलहाल, क्षेत्र की स्थिति पर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की नजर बनी हुई है तथा आंदोलन को लेकर राजनीतिक तनाव अभी भी जारी है।
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