नई दिल्ली। फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट में अचानक आए तेज टर्बुलेंस (Turbulence) ने 145 यात्रियों की जान सांसत में डाल दी। 4 अगस्त को ओडिशा के आसमान में एयरबस A320 (Airbus A320) को कुछ ही सेकंड के भीतर करीब 300 फीट की ऊंचाई का नुकसान हुआ। इस दौरान विमान में सवार 13 यात्री और क्रू के चार सदस्य घायल हो गए। दिल्ली पहुंचने के बाद घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अब इस घटना की जांच के बीच एक और गंभीर जानकारी सामने आई है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि विमान के कैप्टन का लैंडिंग के बाद किया गया साइकोएक्टिव सब्सटेंस यानी डोप टेस्ट पॉजिटिव आया है। हालांकि, इस रिपोर्ट की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पायलट के डोप टेस्ट को लेकर एयर इंडिया ने फिलहाल कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं की है। एयरलाइन के प्रवक्ता के मुताबिक, निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत विमान की लैंडिंग के बाद पायलटों की स्क्रीनिंग की गई थी। लेकिन संबंधित टेस्ट के परिणाम अभी एयर इंडिया के साथ आधिकारिक तौर पर साझा नहीं किए गए हैं। इसलिए एयरलाइन इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है।
एयर इंडिया ने यह भी कहा कि सिविल एविएशन के नियमों के मुताबिक उसके क्रू सदस्यों का नियमित ड्रग टेस्ट किया जाता है। मौजूदा मामले की जांच में एयरलाइन संबंधित एजेंसियों को पूरा सहयोग कर रही है।
घटना को गंभीरता से लेते हुए विमानन नियामक DGCA ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में केवल मौसम और टर्बुलेंस ही नहीं, बल्कि विमान के संचालन से जुड़े दूसरे पहलुओं को भी देखा जा रहा है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि तेज टर्बुलेंस के दौरान कैप्टन ने स्थिति को किस तरह संभाला और क्या विमान के अचानक नीचे जाने के पीछे सिर्फ मौसम जिम्मेदार था या किसी मानवीय चूक की भी भूमिका थी।
इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि तेज झटकों के दौरान विमान के किसी तकनीकी सिस्टम, जिसमें हाइड्रोलिक सिस्टम भी शामिल है, पर कोई असर पड़ा था या नहीं।
एक अहम सवाल यह भी है कि घटना के बाद विमान को किसी नजदीकी एयरपोर्ट, जैसे वाराणसी या लखनऊ, की ओर डायवर्ट करने के बजाय दिल्ली तक ले जाने का फैसला कितना सुरक्षित था।
मामले की जांच पूरी होने तक संबंधित पूरी फ्लाइट क्रू को फ्लाइंग ड्यूटी से हटा दिया गया है। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि जांच में पायलट की मेडिकल और ड्रग स्क्रीनिंग रिपोर्ट के साथ-साथ विमान संचालन से जुड़े तमाम पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।
यदि जांच में किसी पायलट के साइकोएक्टिव पदार्थ के सेवन की पुष्टि होती है, तो उसके खिलाफ विमानन नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कैप्टन के डोप टेस्ट के पॉजिटिव आने की जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है और एयर इंडिया ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए दुर्घटना को सीधे पायलट के नशे में होने से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी।
DGCA की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 300 फीट की अचानक ऊंचाई में कमी के पीछे तेज टर्बुलेंस की भूमिका कितनी थी और क्या किसी मानवीय या तकनीकी कारण ने भी स्थिति को गंभीर बनाया।
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