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नीट-यूजी परीक्षा को फुलप्रूफ बनाने के लिए उठाए गए कदमों को लेकर 3 हफ्ते में हलफनामा दाखिल करे केंद्र सरकार – सुप्रीम कोर्ट

August 19, 2026


नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि नीट-यूजी परीक्षा को फुलप्रूफ बनाने के लिए उठाए गए कदमों को लेकर (Regarding measures taken to make NEET-UG Exam Foolproof) केंद्र सरकार 3 हफ्ते में हलफनामा दाखिल करे (Central Government to file an Affidavit within Three Weeks) ।


  • नीट-यूजी 2026 की परीक्षा और पेपर लीक से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि नीट-यूजी परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और फुलप्रूफ बनाने के लिए सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। बेंच ने केंद्र को 3 हफ्ते के अंदर इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद होगी। याचिकाकर्ताओं ने एनटीए पर सवाल उठाए हैं। याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे कि या तो एनटीए को बदला जाए या फिर पूरी तरह एक नई और ज्यादा सुरक्षित संस्था बनाई जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई संस्था तकनीकी रूप से मजबूत, ज्यादा सुरक्षित और स्वतंत्र तरीके से काम करने वाली होनी चाहिए।

    सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को नीट का पूरा सिस्टम समझाया। उन्होंने कहा कि सिस्टम फुलप्रूफ है, लेकिन कुछ जगहों पर इंसानी दखल होता है। उन्होंने बताया कि अगर फिजिक्स का 100 मार्क्स का पेपर चाहिए तो पहले कई मॉडरेटर से 500 सवालों का क्वेश्चन बैंक बनवाया जाता है। फिर मॉडरेटर का दूसरा सेट उसमें से 100-100 सवाल चुनकर 4 अलग-अलग क्वेश्चन पेपर बनाता है। इसके बाद डीजी एनटीए इन 4 में से सिर्फ 2 पेपर चुनते हैं। तब तक किसी को नहीं पता होता कि आखिरी में कौन सा पेपर जाएगा। इसके बाद पेपर को एक सीलबंद बॉक्स में रखकर दो अलग-अलग प्रिंटिंग प्रेस में भेजा जाता है। प्रिंटिंग प्रेस में सीसीटीवी और सीआईएसएफ की निगरानी होती है। एक अधिकारी डिजिटल चाबी लेकर जाता है। जब वह पहुंचता है तो प्रिंटिंग प्रेस का मालिक डीजी एनटीए को फोन करता है। इसके बाद कोड शेयर करके बॉक्स खोला जाता है। एक बार खुलने के बाद किसी बाहरी व्यक्ति को प्रिंटिंग प्रेस में घुसने की इजाजत नहीं है। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है।

    एसजी ने बताया कि नियम के मुताबिक हर क्लासरूम में 24 स्टूडेंट होते हैं। ओएमआर शीट के साथ क्वेश्चन पेपर एक सीलबंद लिफाफे में होता है। उसे खोलने के लिए सील तोड़नी पड़ती है। तुषार मेहता ने कहा कि हर एग्जाम सेंटर पर पैक्ड क्वेश्चन पेपर भेजे जाते हैं। उन्हें लोहे के बॉक्स में पैक किया जाता है जिसमें नॉन-ओपनेबल लॉक लगा होता है। इसे सिर्फ तोड़ा जा सकता है, इसमें कोई चाबी या डिजिटल नंबर नहीं होता। जिस गाड़ी में पेपर ले जाए जाते हैं वह जीपीएस से ट्रैक होती है। दो अलग-अलग बॉक्स में पेपर के दो सेट होते हैं। ये बॉक्स बैंकों के स्ट्रांग रूम में रखे जाते हैं। आमतौर पर ये एसबीआई या केनरा बैंक होते हैं। मान लीजिए परीक्षा 1 फरवरी को है, तो सुबह सिटी कोऑर्डिनेटर को डीजी बताते हैं कि कौन सा सेट इस्तेमाल करना है। इसके बाद डीएम और अन्य अधिकारियों के साथ मोटरकेड में पेपर ले जाए जाते हैं। हर चीज की वीडियोग्राफी होती है। फिर पैकेट हर क्लास कोऑर्डिनेटर को दिए जाते हैं। सभी स्टूडेंट्स के सामने सील तोड़ी जाती है। परीक्षा के बाद पेपर इन्हीं स्टेज से वापस जमा होते हैं।

    कोर्ट ने एसजी की बात सुनने के बाद कहा कि आपने जो बताया वह पहले से ही राधाकृष्णन कमेटी के दायरे में है। कमेटी ने भी कहा था कि यह एक सिस्टमिक प्रॉब्लम है जिसे संस्थागत आकार देने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा, “हमारी चिंता है कि आप परीक्षा को कैसे इंस्टीट्यूशनलाइज करेंगे। सुरक्षित ऑफिस, कॉन्फिडेंशियल ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी, टेस्टिंग सेंटर, सेंट्रल नेटवर्क ऑपरेटर, इन सबके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए।” बेंच ने कहा कि राधाकृष्णन कमेटी ने भी कहा था कि पेपर की सीलिंग जैसी प्रक्रिया एक परमानेंट कमेटी को करनी चाहिए। कितने डीजी, एडीजी नियुक्त हुए हैं, यह हम रेगुलर एफिडेविट से जानना चाहते हैं।

    कोर्ट ने कहा कि असल में जरूरत है “इंस्टीट्यूशनल मेमोरी और इंस्टीट्यूशनल एक्सपर्टीज” की। आपके पास आर एंड डी इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए। हर परीक्षा सिस्टम और टेक्नोलॉजी बदलती है। आप कौन सा सॉफ्टवेयर बना रहे हैं? एक स्वतंत्र डेटाबेस होना चाहिए। स्टोरेज का इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए। सिक्योरिटी के लिए डायरेक्टर रैंक का अधिकारी चाहिए। तभी पता चलेगा कि दिक्कतें कहां हैं। हमें एक वाइब्रेंट सिस्टम और इंस्टीट्यूशनलाइजेशन चाहिए। एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों को सरकार ने मान लिया है। अब कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन हफ्ते में हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि नीट को फुलप्रूफ बनाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।

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