जयपुर। राजस्थान (Rajsthan) के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में स्कूल से जुड़े मुद्दे को लेकर CJP कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच कथित मारपीट का विवाद (Dispute involving a physical altercation) अब राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है। दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। इसी बीच अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने भी CJP की गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक टकराव का केंद्र नहीं बनाने की अपील की है।
जयपुर के पास रामपुरा-कंवरपुरा गांव में CJP कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच कथित विवाद के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत दर्ज की है। दोनों ओर से मारपीट के आरोप लगाए गए हैं।
घटना के बाद स्कूलों से जुड़े मुद्दे को लेकर सक्रिय CJP के सामने अब शिक्षकों के संगठन की आपत्ति एक नई चुनौती के रूप में सामने आई है।
ABRSM ने कहा है कि उसका उद्देश्य किसी सरकार का बचाव करना नहीं, बल्कि स्कूल परिसरों को राजनीतिक टकराव से दूर रखना है।
संगठन का कहना है कि किसी बाहरी व्यक्ति को स्कूल में प्रवेश के लिए नियमानुसार प्रधानाचार्य से अनुमति लेनी होती है। ऐसे में सरकारी आदेशों या स्कूल प्रशासन से जुड़े विषयों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए करना और शिक्षकों को परेशान करना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
ABRSM के राज्य उपाध्यक्ष पूरणमल नागर ने आरोप लगाया कि बाहरी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की ओर से स्कूल का निरीक्षण करने की कोशिश का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। इसी दौरान विवाद बढ़ा और हाथापाई की स्थिति बनी।
उन्होंने कहा कि संगठन हिंसा का समर्थन नहीं करता, लेकिन स्कूल परिसर को राजनीतिक विवाद में घसीटना भी उचित नहीं है। स्कूल की सुविधाओं, भवन या प्रशासन से जुड़ी किसी समस्या को शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के सामने उचित माध्यम से उठाया जाना चाहिए।
संगठन के नवलकिशोर शर्मा ने कहा कि स्कूलों का उद्देश्य बच्चों का भविष्य संवारना है, किसी राजनीतिक संगठन के एजेंडे को आगे बढ़ाना नहीं।
वहीं संगठन के स्टेट मीडिया सेल से जुड़े सुरेश कुमार बैरागी ने शिक्षकों, अभिभावकों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से विवादों को कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षक संगठन भी स्कूलों की सुविधाओं में सुधार के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहा है।
दूसरी ओर गांव के लोगों ने CJP कार्यकर्ताओं की गतिविधियों को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का दावा है कि कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के कारण गांव में डर का माहौल बन गया था और बच्चे स्कूल जाने से भी डर रहे थे।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि स्कूल भवन की मरम्मत के लिए सरकार पहले ही राशि मंजूर कर चुकी है और स्थानीय स्तर पर मरम्मत का काम कराया जा सकता है।
वहीं CJP की ओर से दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घटना के दौरान उसके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई। संगठन ने दावा किया है कि हमलावर भाजपा नेताओं के बुलाए हुए लोग थे और उसके पास इससे जुड़े सबूत मौजूद हैं।
फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच कर रही है। ऐसे में यह विवाद सिर्फ मारपीट के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्कूल परिसरों में राजनीतिक गतिविधियों, शिक्षकों की भूमिका और स्थानीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved