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पक्का स्कूल बना नहीं, जर्जर ढहाया: 4 साल से पेड़ के नीचे पढ़ रहे छात्र

September 12, 2026

जबलपुर: मध्य प्रदेश में हर बच्चे को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के सरकारी दावों की ज़मीनी हकीकत जबलपुर जिले के नकटिया गांव में बेनकाब होती दिखती है. चार-पांच साल पहले जिस स्कूल भवन को नई और पक्की इमारत बनाने के वादे के साथ ढहाया गया था, वह आज तक प्रशासनिक फाइलों और कागजी प्रक्रियाओं के फेर में अटका हुआ है. नतीजतन, यहां के नौनिहालों का भविष्य किसी पक्के कमरे में नहीं, बल्कि खुले आसमान के नीचे बरगद की छांव और बारिश के दिनों में एक छोटे से आंगनबाड़ी भवन की दहलान में सिमट कर रह गया है.

जबलपुर जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित शासकीय एकीकृत माध्यमिक शाला, नकटिया में कक्षा पहली से आठवीं तक के करीब 48 बच्चे नामांकित हैं. यदि मौसम साफ रहे तो बच्चे बरगद के पेड़ के नीचे टाट-पट्टी बिछाकर पढ़ाई करते हैं. लेकिन जैसे ही आसमान में काले बादल घिरते हैं या बारिश शुरू होती है, बच्चों और शिक्षकों को एक छोटे से आंगनबाड़ी भवन में शरण लेनी पड़ती है. एक ही कमरे में पहली से आठवीं तक की 8 अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाना और पढ़ाना शिक्षकों के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है. जब एक शिक्षक किसी एक कक्षा को पढ़ाता है, तो जगह की कमी के कारण बाकी कक्षाओं के बच्चों का ध्यान भटकता रहता है.


  • कक्षा सातवीं में पढ़ने वाली छात्रा जान्हवी और अन्य छात्राओं (राजकुमारी, अनुराधा, आकांक्षा, सृष्टि) का कहना है कि मौसम बदलते ही उनकी पढ़ाई बाधित हो जाती है. बारिश के समय छोटे कमरे में जीव-जंतुओं का डर बना रहता है. वहीं कक्षा 5वीं से 8वीं में पहुंचे छात्र करण बताते हैं कि उनकी आधी स्कूली जिंदगी बिना भवन के ही बीत गई है. समस्या सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है. स्कूल में खाना बनाने वाली रसोइया मनीषा बताती हैं कि रसोई भवन न होने से मिड-डे मील तैयार करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है. गैस सिलेंडर की सुविधा न होने से लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनता है और बारिश के समय अपने घर से खाना बनाकर लाना पड़ता है.

    स्कूल के शिक्षक बालाराम विश्वकर्मा और जितेन्द्र कुमार बोपचे ने बताया कि स्कूल भवन टूटे करीब 4 साल हो चुके हैं. स्थान की कमी के कारण वे चाहकर भी बच्चों को वह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं. अभिभावक दशरथ प्रसाद कुलस्ते और मेहर सिंह मरकाम का कहना है कि बारिश में भीगने की वजह से बच्चे अक्सर बीमार पड़ जाते हैं.

    अभिषेक गहलोत (सीईओ, जबलपुर जिला पंचायत): नकटिया स्कूल भवन के लिए ‘सीएम राइज’ योजना के तहत लगभग ₹15 लाख की राशि स्वीकृत हो चुकी है. कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही 1-2 हफ्ते में निर्माण शुरू कराया जाएगा.

    नीरज सिंह (स्थानीय विधायक, बरगी): उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ की बात करते समय बच्चों का पेड़ के नीचे पढ़ना बेहद दुखद है. नकटिया स्कूल का मामला उनके संज्ञान में है और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को निर्माण एजेंसी बनाया गया है. राशि मिलते ही 2-3 महीने में काम पूरा कराया जाएगा.

    योगेश शर्मा (जिला परियोजना समन्वयक): 2021 में करीब 40-42 जर्जर भवनों को गिराया गया था. राज्य स्तर (भोपाल) से स्वीकृति में देरी के कारण समस्या आई थी, लेकिन अब नकटिया स्कूल की स्वीकृति मिल चुकी है.

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