
नई दिल्ली ।महाराष्ट्र (Maharashtra) के नागपुर (Nagpur) में आदिवासी छात्राओं ने हॉस्टल और आश्रम स्कूलों से जुड़ी कई समस्याएं अभिजीत दीपके के सामने रखीं। बुधवार को हुई बातचीत में विदर्भ और मराठवाड़ा के अलग-अलग जिलों से छात्राएं पहुंचीं। उन्होंने स्कूलों में सुविधाओं की कमी के साथ छात्राओं की सुरक्षा (Safety) और हॉस्टल की व्यवस्थाओं से जुड़ी परेशानियों की जानकारी दी। बातचीत के दौरान कथित यौन शोषण (Sexual Abuse) और प्रेग्नेंसी टेस्ट (Pregnancy Test) कराए जाने के आरोप भी सामने आए।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि कई आदिवासी आश्रम स्कूलों में बच्चियों को अलग-अलग परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ छात्राओं ने यह भी कहा कि गंभीर मामलों में मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए आदिवासी समुदाय के बच्चों को आरोपी बना दिया जाता है। सरकारी आदिवासी स्कूलों में पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने की बात भी बातचीत के दौरान सामने रखी गई।
भंडारा के आदिवासी हॉस्टल का मुद्दा उठाते हुए एक छात्रा ने बताया कि 15 लड़कियों को एक ही कमरे में ठहराया जाता है। छात्राओं ने हॉस्टल में वॉशरूम की व्यवस्था, स्कॉलरशिप और दूसरी बुनियादी जरूरतों से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र किया। बातचीत में कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि आश्रम स्कूलों में बच्चियों को जबरन प्रेग्नेंसी टेस्ट से गुजरना पड़ता है।
नागपुर स्थित आदिवासी विकास भवन में कई आदिवासी छात्र विरोध प्रदर्शन भी कर रहे थे। इस दौरान अभिजीत दीपके ने छात्र आंदोलन को समर्थन देने की बात कही। उन्होंने छात्रों से अपनी परेशानियों और उनके सामने आने वाली समस्याओं के बारे में जानकारी साझा करने को कहा। इसके लिए व्हाट्सऐप ग्रुप बनाने की बात भी कही गई, ताकि छात्रों की समस्याओं से जुड़ी जानकारी आगे पहुंचाई जा सके।
दीपके ने 17 सितंबर से आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान शुरू करने की घोषणा भी की है। इस अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से की जानी है। इसके तहत आदिवासी स्कूलों का दौरा कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की स्थिति देखने की बात कही गई है।
दीपके ने कहा कि देशभर के आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों की पिछले 80 वर्षों में सरकारों ने उपेक्षा की है। उन्होंने आदिवासी आवासीय विद्यालयों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई स्कूल किराये की इमारतों में संचालित होते हैं। उनके मुताबिक, आदिवासी विद्यार्थियों की समस्याओं और शिक्षा से जुड़ी जरूरतों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।
उन्होंने राजनीतिक दलों द्वारा पार्टी कार्यालयों पर खर्च किए जाने और आदिवासी आवासीय विद्यालयों के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि केवल 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि दर या पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा और सुविधाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।
दीपके ने आदिवासी विद्यार्थियों की मौतों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कई आदिवासी विद्यार्थियों की मौत सांप के काटने से हो जाती है और ऐसी घटनाओं पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं आती। उन्होंने पुणे और मुंबई में ऐसी घटनाएं होने पर अधिक ध्यान दिए जाने की बात कही। हाल ही में वह मध्य प्रदेश के बालाघाट भी पहुंचे थे।
आदिवासी स्कूल ठीक करो अभियान के तहत स्कूलों की स्थिति, विद्यार्थियों की समस्याओं और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की बात कही गई है। छात्राओं द्वारा उठाई गई शिकायतों में हॉस्टल में रहने की व्यवस्था, वॉशरूम, स्कॉलरशिप, सुरक्षा और कथित प्रेग्नेंसी टेस्ट जैसे मुद्दे शामिल हैं।
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