पुणे। पुणे में छोटे बच्चों में हाथ-पैर-मुंह की बीमारी (HFMD) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर 2 से 7 साल की उम्र के बच्चे इसकी चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इस साल ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें एक ही बच्चे को दो से तीन बार संक्रमण (Infection) हुआ है। मौसम में बदलाव के साथ स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में बच्चों के करीब-करीब रहने से संक्रमण फैलने की रफ्तार बढ़ने की बात कही जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार HFMD बेहद संक्रामक बीमारी है। अधिकांश बच्चे आराम और लक्षणों के आधार पर उपचार से 7 से 10 दिन में ठीक हो जाते हैं। हालांकि, गंभीर संक्रमण या कमजोर बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जयंत नवरांगे के अनुसार, पिछले पांच सप्ताह के दौरान पुणे शहर में बच्चों में HFMD के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। संक्रमण घरों, सोसायटियों और स्कूलों तक फैल रहा है।
उन्होंने बताया कि उनके पास हर सप्ताह करीब 4 से 5 नए मामले सामने आ रहे हैं। पिछले एक महीने में लगभग 30 बच्चे उपचार के लिए आए। इनमें कुछ बच्चों में संक्रमण दोबारा होने की जानकारी मिली है। कुछ मामलों में एक ही बच्चे को दो से तीन बार HFMD होने की बात सामने आई।
डॉ. नवरांगे के मुताबिक यह बीमारी सामान्य तौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक देखी जाती है, हालांकि बड़े बच्चे और वयस्क भी संक्रमित हो सकते हैं। अधिकांश मामलों में बीमारी गंभीर नहीं होती, लेकिन यह एक बच्चे से दूसरे तक बहुत तेजी से फैलती है।
संक्रमण रोकने के लिए बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालने, घर की सतहों, खिलौनों और रोजाना इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को साफ एवं कीटाणुरहित रखने की सलाह दी गई है। संक्रमित बच्चे के सीधे संपर्क से भी बचना जरूरी है।
डॉक्टरों के अनुसार HFMD के प्रमुख लक्षणों में बुखार, सुस्ती, थकान, मुंह में छाले और त्वचा पर छोटे लाल दाने शामिल हैं। ये दाने बाद में जीभ, मसूड़ों और गालों के अंदर फफोलों का रूप ले सकते हैं।
नोबल हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च सेंटर के अकादमिक प्रमुख एवं वरिष्ठ एनआईसीयू सलाहकार डॉ. अनिल खामकर ने बताया कि पुणे में HFMD के मामले आमतौर पर जून से अक्टूबर और दिसंबर से जनवरी के बीच अधिक देखे जाते हैं। शुरुआत में बच्चे को बुखार और सुस्ती होती है। इसके बाद मुंह के अंदर तथा हाथ-पैरों पर दाने और छाले दिखाई देने लगते हैं।
उन्होंने बताया कि दाने कोहनी, घुटनों और नितंबों पर भी हो सकते हैं। इनमें जलन, खुजली और दर्द हो सकता है। मुंह और गले में छाले होने के कारण बच्चे को खाना या पानी पीना भी तकलीफदेह लग सकता है।
डॉ. जयंत नवरांगे के अनुसार HFMD के लिए कोई विशेष दवा उपलब्ध नहीं है और उपचार मुख्य रूप से लक्षणों को नियंत्रित करने पर आधारित होता है। चूंकि संक्रमण नजदीकी संपर्क से तेजी से फैल सकता है, इसलिए इसकी रोकथाम चुनौतीपूर्ण है।
बीमार बच्चे को अन्य बच्चों से अलग रखना, हाथों की सफाई पर ध्यान देना और घर तथा स्कूल में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को साफ रखना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है।
पुणे क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवाओं के उप निदेशक डॉ. भगवान पवार ने बताया कि 3 से 7 साल के बच्चे संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने स्कूल प्रशासन और परिवारों से बचाव के उपाय तत्काल अपनाने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि जिन बच्चों में HFMD के लक्षण दिखाई दें, उन्हें तत्काल अन्य बच्चों से अलग किया जाए और चिकित्सकीय सलाह ली जाए। यह संक्रमण संक्रमित सतहों, खिलौनों और सीधे संपर्क के माध्यम से फैल सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश बच्चे एक सप्ताह से 10 दिन के भीतर स्वस्थ हो जाते हैं। हालांकि, बच्चे की हालत बिगड़ने, पानी पीने में परेशानी या गंभीर लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
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