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संदीपनी की हाईटेक धमक से पुराने स्कूलों में खलबली

September 22, 2026

  • 704 नए दाखिलों से संदीपनी में छात्रों की संख्या 2150 पर पहुंची
  • दूसरी शालाओं में घटती संख्या ने बढ़ाई सरप्लस शिक्षकों की परेशानी

सिहोरा। संदीपनी पंडित विष्णु दत्त शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी तंत्र की एक नई और चमचमाती तस्वीर इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है। शासन द्वारा संचालित और आधुनिक सुविधाओं से लैस सरकारी संदीपनी स्कूल अपनी हाई-टेक सुविधाओं के दम पर निजी कॉन्वेंट स्कूलों को पछाडऩे वाला है। लेकिन, सरकार के इस एडवांस स्कूल की बढ़ती धमक ने विभाग के भीतर ही एक नया संकट खड़ा कर दिया है। संदीपनी स्कूल की इस जबरदस्त कामयाबी के आगे क्षेत्र के अन्य पुराने सरकारी माध्यमिक (मिडिल), हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों का वजूद खतरे में पड़ गया है। इन पुराने शासकीय स्कूलों में छात्र संख्या का ग्राफ तेजी से गिरा है, जिससे वहां पदस्थ सरकारी शिक्षकों के बीच नौकरी जाने एवं दूरदराज ट्रांसफर होने का डर सताने लगा है।


  • अतिथि शिक्षकों की नौकरी पर मंडराया खतरा
    कई सांदीपनि स्कूलों में अभी रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे हैं। मर्जर के बाद जो नियमित शिक्षक अब यहां पहुंचेंगे, वे इन्हीं खाली पदों पर पदस्थ किए जाएंगे। इसका सीधा असर यह होगा कि इन पदों पर पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों की जगह नहीं बचेगी और उनकी नौकरी पर खतरा मंडराने लगेगा। यानी नियमित शिक्षकों की पद स्थापना के बाद अतिथियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

    25 सितंबर तक तय होगा कौन रुकेगा, कौन जाएगा
    नए आदेश के अनुसार जो शिक्षक सांदीपनि में ही बने रहना चाहते हैं, उन्हें फिलहाल वहीं रखा जाएगा। लेकिन जो शिक्षक दूसरी स्कूल जाना चाहते हैं, उनकी काउंसलिंग 25 सितंबर तक पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी बीच अगर किसी स्कूल में जरूरत से ज्यादा शिक्षक पहुंच गए हैं, तो जिला स्तर की एक कमेटी तय करेगी कि किसे यहीं रखना है और किसे कहां और भेजना है। यह फैसला बच्चों की नई दाखिला संख्या के आधार पर लिया जाएगा, न कि शिक्षक की काबिलियत के आधार पर।

    प्रदेश में 67 सांदीपनि स्कूलों में मर्ज हो चुके हैं 450 स्कूल
    सरकार के मुताबिक, प्रदेश में शून्य नामांकन वाली शालाओं का एक परिसर, एक शाला और सांदीपनि स्कूल व्यवस्था के तहत युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इसी कवायद के पहले चरण में करीब 450 स्कूल सिमटकर सिर्फ 67 सांदीपनि विद्यालयों में समा गए हैं। यानी औसतन हर एक सांदीपनि स्कूल में आसपास की छह-सात पुरानी शालाएं मिला दी गई हैं। दूसरे चरण में भी यह विलय प्रक्रिया जारी है। नीति में मर्जर के लिए 3 किलोमीटर का दायरा तय है, लेकिन असल में इतने स्कूलों को समेटने के लिए कई जगह बच्चों को 5 से 10 किलोमीटर तक दूर भेजा जा रहा है।

    सिहोरा संदीपनी का नया कीर्तिमान: 704 नए एडमिशन
    सिहोरा के शैक्षणिक इतिहास में किसी सरकारी संस्था ने पहली बार ऐसा ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। शासन के इस एडवांस स्कूल की लोकप्रियता का आलम यह है कि नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक कुल 704 नए बच्चों ने इस सत्र में एडमिशन लिया है। बच्चों की टोटल संख्या हो गई है 2150 क्रेज की मुख्य वजह स्कूल का बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वालिफाइड सरकारी स्टाफ, आधुनिक खेलकूद की सुविधाएं और कॉन्वेंट की तर्ज पर अनुशासन।एक ही विभाग में असंतुलन एक तरफ जहां सरकारी संदीपनी स्कूल में दाखिले के लिए लंबी कतारें लगी हैं, वहीं दूसरी तरफ सिहोरा के अन्य पुराने सरकारी स्कूलों के तालेबंदी की नौबत आ गई है।

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