
इंदौर। नगर निगम (Municipal council) द्वारा राज्य सरकार (state government) के समक्ष यह प्रस्ताव रखा गया है कि निगम की लीज की संपत्ति को 35% शुल्क लेकर फ्री होल्ड (freehold) कर दिया जाए। यह प्रस्ताव लीज के नियमों में संशोधन के लिए राज्य सरकार द्वारा मांगे गए सुझाव के तहत निगम द्वारा दिया गया है। इसके साथ ही लीज शर्तों के उल्लंघन के मामलों को अर्थदण्ड लगाकर सेटल करने का भी प्रस्ताव दिया गया है।
राज्य सरकार द्वारा प्रदेशभर में नगरीय निकाय द्वारा लीज पर दी गई संपत्ति के नियम में संशोधन करने की पहल की जा रही है। इसके तहत सरकार की ओर से सभी नगर निगम से कहा गया है कि वह अपनी सुविधा के लिए इन नियमों में जो परिवर्तन चाहते हैं, इसका प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करें। सरकार के समक्ष इंदौर नगर निगम द्वारा लीज नियमों में संशोधन के लिए 15 प्रस्ताव भेजे गए हैं। इंदौर शहर में बहुत सी जमीन नगर निगम द्वारा मात्र एक रुपए की लीज पर दी गई है। इन जमीनों की लीज का नवीनीकरण भी नहीं हुआ है और कई स्थानों पर तो जिस व्यक्ति के नाम लीज पर जमीन दी गई थी, उसकी मृत्यु हो जाने पर उसके वारिसों के नाम पर नामांतरण भी नहीं हो सका है। बहुत सेे लोगों द्वारा लीज की जमीन का क्रय-विक्रय कर दिया गया तो ऐसे में जमीन को खरीदने वाले के नाम पर भी जमीन दर्ज नहीं की जा सकी है।
इस पूरे मामले से जुड़े नगर निगम के अधिकारी ने बताया कि निगम द्वारा आवासीय उपयोग के लिए जमीन दी गई थी, लेकिन समय के साथ कई लोगों द्वारा इस जमीन का उपयोग व्यावसायिक रूप से कर लिया गया। ऐसे मामले को लीज शर्तों का उल्लंघन माना गया है। इस स्थिति में भी लीज का नवीनीकरण नहीं किया जा सका है। लीज पर ली गई जमीन पर किए गए निर्माण में अवैध निर्माण होने की स्थिति में भी लीज का नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है। इन सब स्थितियों के चलते हुए इंदौर में लीज पर दी गई जमीन से ना तो नगर निगम को लीज रेंट मिल पा रहा है और ना ही आगे कार्रवाई हो पा रही है। यह पूरा मामला जब पिछले दिनों भोपाल में आयोजित की गई उच्चस्तरीय बैठक में रखा गया तो सरकार की ओर से लीज के नियम में संशोधन की पहल की गई। सरकार द्वारा सभी नगर निगम से इन नियम में किए जाने वाले संशोधन के लिए सुझाव मांगे गए। इंदौर में लीज की जमीन के मामले सबसे ज्यादा उलझे हुए हैं। ऐसी स्थिति में इंदौर नगर निगम द्वारा सरकार को 15 सुझाव भेजे गए हैं। निगम की ओर से सरकार को भेजे गए सुझाव में सबसे महत्वपूर्ण सुझाव निगम द्वारा लीज पर दी गई। जमीन को फ्री होल्ड करने की अनुमति देने का है। इसके लिए निगम द्वारा यह प्रस्ताव रखा गया है कि जमीन की कलेक्टर गाइडलाइन से जो कीमत है, उसकी 35′ राशि लेकर जमीन को फ्री होल्ड करने का प्रावधान किया जाना चाहिए। इसके साथ ही लीज शर्तों के उल्लंघन के मामलों को अर्थदंड लगाकर नियमित करने का भी सुझाव दिया गया है।
निगम को होगी 2000 करोड़ की कमाई
निगम के अधिकारियों का मानना है यह कि यदि सरकार द्वारा निगम की लीज की जमीन को फ्री होल्ड करने की अनुमति दी जाती है तो निगम को कम से कम 2000 करोड़ रुपए की कमाई होगी। इस कमाई से निगम की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा और उसके साथ ही लीज की जमीन को लेकर चल रहे विवाद भी समाप्त हो जाएंगे। बड़ी संख्या में लोग इंदौर विकास प्राधिकरण की तरह लीज की जमीन को निगम से फ्री होल्ड करवाना चाहते हैं। निगम द्वारा सरकार के समक्ष फ्री होल्ड करने का प्रावधान नियमों में शामिल करने के लिए पिछले कई सालों से कोशिश की जा रही है।
लीज की जमीन का रिकॉर्ड भी अव्यवस्थित
नगर निगम द्वारा पिछले 70 साल में जो जमीन लीज पर दी गई है, उसका रिकॉर्ड भी अधूरा है। निगम में 35 रजिस्टर हैं, जिनमें की लीज पर दी गई जमीन के बारे में जानकारी लिखी हुई है। अब इस पूरी जानकारी को व्यवस्थित तरीके से एक्सेल शीट में तैयार किया जा रहा है। अभी तक 22 रजिस्टर की जानकारी को एक्सेल शीट में कन्वर्ट कर तैयार कर लिया गया है। हालांकि इन रजिस्टर में भी सीधे तौर पर यह नहीं लिखा गया है कि किस व्यक्ति को किस स्थान की कितनी जमीन लीज पर दी गई है। इसमें हर व्यक्ति को दी गई जमीन की पूरी कहानी एक, दो और तीन पेज भरकर लिखी गई है। ऐसी स्थिति में पूरी कहानी को पढ़कर जानकारी को निकालना पड़ रहा है ।
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