
इंदौर। इंदौर पुलिस कमिश्नरेट ने साइबर अपराधों पर शिकंजा कसते हुए ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स 2’ के तहत एक बहुत बड़ा अभियान चलाया है। म्यूल बैंक खातों और ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने 50 से अधिक एफआईआर दर्ज कर 90 से ज्यादा आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है।
इंदौर शहर में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों, वित्तीय धोखाधड़ी और अवैध वित्तीय लेन-देन के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए इंदौर पुलिस कमिश्नरेट ने आक्रामक रुख अपना लिया है।भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के निर्देश पर पूरे देश में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत इंदौर में ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स 2’ को बेहद प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारा गया है। पुलिस कमिश्नरेट के सभी थानों और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीमों ने समन्वय बनाकर साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों और उन्हें संचालित करने वाले सिंडिकेट पर ताबड़तोड़ दबिश दी है। इस व्यापक अभियान के अब तक के परिणामों के तहत इंदौर में 50 से अधिक गंभीर एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
इसके साथ ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न स्थानों से 90 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों से की गई गहन पूछताछ में बेहद चौकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच में पता चला कि ये आरोपी टेलीग्राम चैनलों और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भोले-भाले या लालची लोगों से संपर्क कर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों को किराए पर लेकर उनमें साइबर स्कैम की अवैध रकम मंगाई जाती थी, और बदले में खाताधारक को 5 से 10 प्रतिशत तक का कमीशन दिया जाता था। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान यहीं थमने वाला नहीं है। मामले की जानकारी देते हुए एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने मीडिया को बताया कि इस तरह के अवैध कृत्यों में शामिल या लालच में आकर अपने बैंक खाते किराए पर देकर साइबर अपराधियों की मदद करने वाले अन्य संदिग्धों की भी पहचान की जा रही है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते, एटीएम या दस्तावेज इस्तेमाल के लिए न दें, अन्यथा वे भी इस गंभीर कानूनी शिकंजे की चपेट में आ सकते हैं। इंदौर में साइबर अपराधियों के खिलाफ यह सख्त अभियान लगातार जारी रहेगा।
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