श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर (J&K) में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) की सरकार के सामने पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी चुनौती (The challenge of resentment) बनती जा रही है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद असंतुष्ट विधायकों की बैठकों का दौर जारी है। खबरों के मुताबिक, करीब 25 नाराज विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम देते हुए मांगें पूरी नहीं होने पर सरकार से समर्थन वापस लेने की चेतावनी दी है। इस बीच पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला शुक्रवार को नाराज विधायकों से मुलाकात कर सकते हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भी बैठक में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट विधायकों को मनाने में जुटा है। नाराजगी की शुरुआत 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हुई। इसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार विधायकों अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी (कालू) को मंत्री बनाया गया था। कई वरिष्ठ विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से असंतोष सामने आया।
नाराज विधायकों की पांच मांगें
रिपोर्ट्स के मुताबिक, असंतुष्ट विधायकों ने नेतृत्व के सामने पांच मांगें रखी हैं। इनमें मंत्रिमंडल का दोबारा गठन, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार को हटाना, अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाना, नियुक्तियों से पहले सभी वरिष्ठ नेताओं से विचार-विमर्श करना और मौजूदा मंत्रियों को हटाना शामिल है। हालांकि, इन मांगों को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पत्र या बयान जारी नहीं किया गया है।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस कांग्रेस समेत अन्य दलों के समर्थन से सरकार चला रही है। ऐसे में पार्टी के भीतर असंतोष और विधायकों की संभावित बगावत सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है।
आगा रुहुल्ला मेहदी के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
नेशनल कॉन्फ्रेंस के लोकसभा सांसद आगा रुहुल्ला मेहदी के इस्तीफे ने भी पार्टी की मुश्किलें बढ़ाई हैं। मेहदी और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। उन्होंने पार्टी पर चुनाव के दौरान किए गए प्रमुख वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया है। अपने समर्थकों के बीच करीब 80 मिनट के भाषण में उन्होंने नई राजनीतिक पार्टी बनाने के बजाय जम्मू-कश्मीर के लोगों के सम्मान और अधिकारों की बहाली के लिए आंदोलन शुरू करने की बात कही।
मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर अनुच्छेद 370 की बहाली की लड़ाई छोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी 2024 के चुनाव में अनुच्छेद 370 की बहाली, कैदियों की रिहाई और मुफ्त बिजली जैसे वादों का सम्मान करने में विफल रही है। उन्होंने अपने इस्तीफे को ‘आजादी का फरमान’ बताते हुए कहा कि कुछ लोग उनसे नई पार्टी बनाने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता लोगों की गरिमा और सम्मान बहाल करने के लिए आंदोलन शुरू करना है।
मेहदी ने कहा कि 2024 के चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस का समर्थन करने की अपील करना गलती साबित हुई। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने भले ही हार मान ली हो, लेकिन वे अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेंगे।
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