चंडीगढ़। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव (Assembly elections) से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक टकराव का केंद्र बनता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) जहां नशे की समस्या को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) की सरकार पर हमलावर है, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) ने अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच की मांग कर राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है।
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने ईडी को पत्र लिखकर 736.96 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केस दर्ज कर जांच करने का आग्रह किया है। विजिलेंस ब्यूरो की जांच में मजीठिया को कथित वित्तीय नेटवर्क का मास्टरमाइंड और मुख्य लाभार्थी बताया गया है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ईडी की कार्रवाई पर भाजपा की नजर
भगवंत मान सरकार के इस कदम को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इसकी वजह पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और भाजपा के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाएं हैं। दोनों दल 2020 में किसान आंदोलन और कृषि कानूनों के मुद्दे पर अलग हो गए थे। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके फिर साथ आने की अटकलें लगाई जा रही हैं।
भाजपा ने पंजाब में नशे की समस्या को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाया है। पार्टी का आरोप है कि आप सरकार नशीले पदार्थों की आपूर्ति रोकने और तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने में विफल रही है। भाजपा अपने ‘नशा मुक्त पंजाब’ अभियान के जरिए राज्य सरकार को घेर रही है।
वहीं, आप ने अकाली नेता से जुड़े कथित वित्तीय मामले को केंद्रीय एजेंसी के पास भेजकर भाजपा के सामने सवाल खड़ा किया है कि वह अपने पुराने राजनीतिक सहयोगी के खिलाफ जांच और कार्रवाई को लेकर क्या रुख अपनाएगी।
736.96 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय नेटवर्क की जांच
विजिलेंस ब्यूरो के पत्र के मुताबिक, कथित वित्तीय नेटवर्क में परिवार के सदस्यों, करीबी सहयोगियों, घरेलू कंपनियों और विदेशी इकाइयों के माध्यम से धन का लेन-देन किया गया। जांच में साइप्रस और सिंगापुर की कंपनियों से जुड़े वित्तीय लेन-देन भी शामिल हैं।
राज्य सरकार की जांच में कथित तौर पर तीन चरणों में धन के लेन-देन का पता लगाया गया है। पहले चरण में धन जुटाना, दूसरे में विभिन्न वित्तीय माध्यमों से उसे इधर-उधर करना और तीसरे चरण में उसे संपत्तियों में निवेश करना शामिल बताया गया है।
आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम पर संपत्तियां, विमान, निवेश और अन्य परिसंपत्तियां खरीदने में किया गया। विजिलेंस ब्यूरो ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामले की जांच के लिए ईडी से हस्तक्षेप का आग्रह किया है।
शिअद और भाजपा करीब दो दशक तक पंजाब में गठबंधन के सहयोगी रहे हैं। वर्ष 2020 में किसान आंदोलन और तीन कृषि कानूनों को लेकर दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए थे। अब फिर से गठबंधन की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं।
बिक्रम सिंह मजीठिया अकाली दल के प्रमुख नेता हैं और पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के साढ़ू हैं। ऐसे में उनके खिलाफ कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की संभावित कार्रवाई को पंजाब की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि केंद्रीय जांच एजेंसी विजिलेंस ब्यूरो के पत्र पर क्या कदम उठाती है।
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