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AI से लैस ‘काल भैरव’ बनाएगा भारत की ताकत, चीन-पाकिस्तान के लिए बढ़ेगी चुनौती

May 15, 2026

नई दिल्ली। भारत (India) रक्षा तकनीक के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। देश के पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ‘काल भैरव’ का निर्माण जल्द शुरू होने वाला है। यह परियोजना भारतीय एआई वारफेयर कंपनी एफडब्ल्यूडीए (FWDA) और पुर्तगाल की (SKETCHPIXEL) के सहयोग से विकसित की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, इस अत्याधुनिक विमान का निर्माण Portugal में शुरू होगा। परियोजना के तहत SKETCHPIXEL एडवांस सिमुलेशन सिस्टम और प्रशिक्षण तकनीक उपलब्ध कराएगी, जबकि एफडब्ल्यूडीए एयरफ्रेम डिजाइन और ऑटोनोमस एआई सिस्टम विकसित करेगी।

AI तकनीक से होगा पूरी तरह लैस

‘काल भैरव’ को आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है। इसमें नेविगेशन, लक्ष्य पहचान, हमला और मिशन कोऑर्डिनेशन जैसी क्षमताएं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित होंगी। माना जा रहा है कि यह एयरक्राफ्ट बिना पायलट के भी कई जटिल मिशन अंजाम देने में सक्षम होगा।


  • क्या होंगी इसकी प्रमुख क्षमताएं?

    • लगभग 3000 किलोमीटर तक की ऑपरेशनल रेंज
    • 25 से 30 घंटे तक लगातार उड़ान भरने की क्षमता
    • युद्ध की स्थिति में करीब 11 घंटे तक मिशन ऑपरेशन
    • 15 हजार फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान
    • 91 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने की क्षमता
    • AI आधारित टारगेटिंग और ऑटोमैटिक मिशन कंट्रोल सिस्टम

    रिपोर्ट के अनुसार इसकी क्रूज स्पीड लगभग 42 मीटर प्रति सेकंड होगी, जिससे यह लंबी दूरी के मिशनों में प्रभावी साबित हो सकता है।

    ड्रोन युद्ध के दौर में बड़ा दांव

    हाल के वर्षों में Russo-Ukrainian War और पश्चिम एशिया में हुए संघर्षों ने यह दिखाया है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और AI आधारित सिस्टम निर्णायक भूमिका निभाएंगे। इसी कारण भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान अब स्वॉर्म ड्रोन, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम और ऑटोनोमस एयरक्राफ्ट पर तेजी से काम कर रहा है।

    अमेरिकी प्रीडेटर से काफी सस्ता

    तुलना की जाए तो अमेरिका का MQ-9 Reaper ड्रोन करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत का माना जाता है, जबकि ‘काल भैरव’ की अनुमानित लागत लगभग 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है। कम लागत और स्वदेशी सप्लाई चेन से जुड़े होने के कारण इसे भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में ऐसे AI एयरक्राफ्ट भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होते हैं, तो सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और सामरिक ऑपरेशन की क्षमता कई गुना बढ़ सकती है। साथ ही यह परियोजना भारत को रक्षा निर्यात और स्वदेशी सैन्य तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है।

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