इस्लामाबाद/नई दिल्ली। एक बार फिर भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) के बीच हवाई रास्तों (Airways) को लेकर तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद (airspace closed) रखने का फैसला जारी रखा है, जिसके जवाब में भारत ने भी पाकिस्तानी एयरलाइंस के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है।
पाकिस्तान की एविएशन अथॉरिटी ने इस संबंध में नया नोटिस (NOTAM) जारी करते हुए साफ किया है कि भारतीय कमर्शियल और सैन्य विमान 24 मई 2026 तक उसके एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यह प्रतिबंध पहले से लागू फैसले का ही विस्तार माना जा रहा है, जिसकी शुरुआत अप्रैल 2025 में हुई थी।
पुराना विवाद, नया असर
दोनों देशों के बीच एयरस्पेस बंद करने का यह कदम नया नहीं है। इससे पहले कारगिल युद्ध और पुलवामा हमला के बाद भी इसी तरह की पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं।
बताया जा रहा है कि हालिया प्रतिबंध की पृष्ठभूमि में कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला भी एक बड़ी वजह बना, जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाए थे, जबकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।
एयरलाइंस पर बड़ा असर
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारतीय एयरलाइंस पर पड़ा है। खासतौर पर खाड़ी देशों, यूरोप और कॉकस क्षेत्र की उड़ानों के लिए पाकिस्तान का हवाई मार्ग काफी अहम माना जाता रहा है।
अब एयरस्पेस बंद होने के चलते एयरलाइंस को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे:
- उड़ानों का समय 15 मिनट से लेकर कई घंटों तक बढ़ रहा है
- ईंधन की खपत ज्यादा हो रही है
- कुछ फ्लाइट्स को बीच में रुककर ईंधन भरना पड़ रहा है
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर हफ्ते करीब 800 उड़ानें इस फैसले से प्रभावित हो रही हैं।
भारत का जवाब
पाकिस्तान के फैसले के बाद भारत ने भी समान कदम उठाते हुए अपने एयरस्पेस को पाकिस्तानी विमानों के लिए बंद कर दिया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अभी भी दोनों देशों के ऊपर से गुजरने की अनुमति दी गई है, जिससे वैश्विक एविएशन पूरी तरह प्रभावित न हो।
क्षेत्रीय तनाव का असर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह एयरस्पेस विवाद और जटिल हो गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो इसका असर एविएशन इंडस्ट्री के साथ-साथ व्यापार और यात्री सेवाओं पर भी लंबे समय तक पड़ सकता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच एयरस्पेस को लेकर खींचतान अब लंबी होती जा रही है। इसका सीधा असर उड़ानों, लागत और समय पर पड़ रहा है—और फिलहाल राहत के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।