
क्वेटा। बलूचिस्तान में आम नागरिकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। बलूच मानवाधिरकार संगठनों ने पाकिस्तान सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने एक व्यक्ति की हत्या और छात्रों को जबरन गायब करने का आरोप लगाया है।
बलूचिस्तान के मानवाधिकार संगठन ‘बलूच यकजेहती समिति’ के अनुसार, केच जिले के तुर्बात क्षेत्र में 28 वर्षीय सद्दाम का शव शुक्रवार को डी-बलूच इलाके में फेंका हुआ पाया गया। संगठन ने इस घटना को बलूचिस्तान में जारी हिंसा और मानवाधिकारों के हनन के एक निरंतर पैटर्न का हिस्सा बताया है।
एक अन्य मानवाधिकार निकाय ‘बलूच वॉयस फॉर जस्टिस’ ने दो छात्रों की जबरन गुमशुदगी का मामला उठाया है। आरोप है कि 19 वर्षीय शुक्रुल्लाह और 20 वर्षीय जुबैर बलूच को 4 जून को प्रांत के दलबंदिन इलाके से पाकिस्तानी बलों द्वारा कथित तौर पर गायब कर दिया गया। इन छात्रों के परिवारों को उनके बारे में कोई जानकारी भी नहीं दी गई।
संगठन ने आगे कहा, ‘सद्दाम की हत्या बलूचिस्तान में जारी हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन के सिलसिले में एक और दुखद घटना है। पूरे क्षेत्र में परिवार अपनों को खोने का दर्द झेल रहे हैं और उन्हें न्याय भी नहीं मिल रहा है।’ मानवाधिकार निकायों ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, पत्रकारों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से अपील की है कि वे बलूचिस्तान में हो रहे इन अत्याचारों का संज्ञान लें।
बीवीजे ने दावा किया कि बलूचिस्तान में नागरिकों के निरंतर लापता होने और संदिग्ध मौतों ने क्षेत्र में असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है। मानवाधिकार संगठनों का तर्क है कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता, उचित कानूनी प्रक्रिया और मनमानी हिरासत से सुरक्षा का अधिकार है। जब तक उन परिवारों की आवाज नहीं सुनी जाएगी, तब तक क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की बहाली संभव नहीं है।
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