
इंदौर। प्राधिकरण की योजनाओं में शामिल जमीनों को छुड़वाने और अभिन्यास मंजूरी के लिए एनओसी हासिल करने में कुछ फर्जीवाड़े सामने आ चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय पूर्व रिंग रोड पर स्थित योजना 97 पार्ट-2 और 4 की 110 एकड़ पर फैसला सुनाया और उसके बाद जमीनों को छुड़वाने के उच्च स्तरीय प्रयास तो हुए ही, वहीं कुछ फर्जी एनओसी भी सामने आई। पिछले दिनों भी बिजलपुर की 8 हजार स्क्वेयर फीट जमीन पर फर्जी एनओसी दी गई थी। उसके बाद ऐसा ही मामला हुकमाखेड़ी की जमीन का भी पकड़ाया।
योजना 97 पार्ट-4 में शामिल हुकमाखेड़ी के सर्वे नम्बर 95 और 96 के सर्वे नम्बर 95/1/5/2 और 95/1/5/3, 96 में शामिल 0.142 हेक्टेयर यानी लगभग साढ़े 16 हजार स्क्वेयर फीट जमीन श्रीमती तारा पति राजेन्द्र प्रसाद और राजेन्द्र प्रसाद पिता लालाराम उपाध्याय, 97, विष्णुपुरी मैन रोड, इंदौर के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। उक्त जमीन प्राधिकरण की योजना में शामिल होने के कारण जमीन मालिक को स्वयं के विकास के लिए एनओसी नहीं मिल सकी, लेकिन इसी जमीन की एक फर्जी और कूटरचित एनओसी भूअर्जन अधिकारी सुदीप मीणा के फर्जी हस्ताक्षर और उनके कार्यालय के फर्जी जावक नम्बर दिनांक 26.12.2024 में दर्ज करना बताई गई और इस फर्जी एनओसी के आधार पर नगर तथा ग्राम निवेश से आवासीय इकाइयों के विकास कार्य हेतु अभिन्यास मंजूर करवाने के प्रयास किए गए।
चूंकि नगर तथा ग्राम निवेश इस तरह के आवेदनों पर प्राधिकरण से जानकारी मांगता है। इसके चलते जब तत्कालीन सहायक संचालक केएस गवली ने इस प्रकरण की जानकारी दी, तब जांच करवाने पर पाया गया कि उक्त एनओसी फर्जी है, जो कभी भी प्राधिकरण द्वारा अधिकृत रूप से जारी ही नहीं की गई। नतीजतन भू-अर्जन अधिकारी मीणा ने थाना प्रभारी तुकोगंज को पिछले दिनों पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया। इसके चलते तुकोगंज थाने ने इस मामले में पति-पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर विभिन्न धाराओं में दर्ज कर ली, जिसमें बीएनएस की धारा 318 (2), 336, 338 और 340 में प्रकरण दर्ज किया।
ये सभी पुरानी प्रचलित चार सौ बीसी से जुड़ी धाराएं हैं। प्राधिकरण द्वारा सौंपी गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने तारा उपाध्याय और उनके पति राजेन्द्र प्रसाद के खिलाफ उक्त एफआईआर दर्ज की। प्राधिकरण के लेटरपेड पर उक्त फर्जी एनओसी उसी तरह तैयार की गई, जिस तरह पूर्व में कुछ एनओसी पकड़ाई भी गई है। प्राधिकरण का कहना है कि योजना 97 पार्ट-2 और 4 में किसी तरह की एनओसी जारी ही नहीं की जा सकती, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने निजी जमीन मालिकों की याचिकाएं खारिज कर प्राधिकरण के पक्ष में फैसला सुनाया। कुछ समय पूर्व बिजलपुर, तहसील राऊ की जमीन के सर्वे नम्बर 3/2 पर जारी हुई 8 हजार स्क्वेयर फीट की फर्जी एनओसी का मामला सामने आया था, जिसमें विधि शाखा में पदस्थ बाबू को निलंबित भी किया था। हालांकि उक्त फर्जी एनओसी छाबड़ा परिवार के नाम पर कुछ लोगों ने बनवाई और बाबू को भी फंसा दिया।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved