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दिवाली से पहले केंद्र सरकार का फैसला, पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी खत्म, डीजल और ATF पर बढ़ाया टैक्स

November 01, 2026

नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central Government) ने वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में जारी उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच पेट्रोलियम उत्पादों (Petroleum Products) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall tax) की दरों में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय ने 31 अक्टूबर को जारी अधिसूचना में पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाली 2.50 रुपए प्रति लीटर की ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी है। वहीं, डीजल और हवाई ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर टैक्स बढ़ा दिया गया है। नई दरें 31 अक्टूबर से लागू होकर अगले दो सप्ताह तक प्रभावी रहेंगी।

डीजल पर 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा टैक्स
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को मिलाकर अब 11.50 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। पहले यह दर 8.50 रुपए प्रति लीटर थी। इस तरह डीजल के निर्यात पर टैक्स में सीधे 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।

इसी तरह ATF के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी 10.50 रुपए से बढ़ाकर 11 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है। दूसरी ओर, पेट्रोल के निर्यात पर अब कोई एक्सपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी। पहले इस पर 2.50 रुपए प्रति लीटर की दर से शुल्क वसूला जा रहा था।

घरेलू बाजार में नहीं होगा बदलाव
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि टैक्स की नई दरें केवल पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लागू होंगी। घरेलू बाजार में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी इस फैसले का देश में पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगने वाले करों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।


  • असाधारण मुनाफे पर लगता है विंडफॉल टैक्स
    विंडफॉल टैक्स का इस्तेमाल सरकार उन परिस्थितियों में करती है, जब कंपनियों को बाजार की असामान्य परिस्थितियों के कारण सामान्य से अधिक मुनाफा होने की संभावना रहती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ने पर रिफाइनरी कंपनियों को विदेशों में पेट्रोल और डीजल बेचने से अतिरिक्त कमाई हो सकती है। ऐसे में सरकार निर्यात पर टैक्स लगाकर उस अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा हासिल करती है।

    निर्यात पर शुल्क बढ़ाने का एक उद्देश्य विदेशों में ईंधन की बिक्री को अपेक्षाकृत कम आकर्षक बनाना और घरेलू बाजार में इसकी पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरी कंपनियों को प्रोत्साहित करना भी है।

    2022 में पहली बार लगाया गया था टैक्स
    भारत ने जुलाई 2022 में पहली बार पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लगाया था। करीब दो साल बाद दिसंबर 2024 में इसे समाप्त कर दिया गया। इसके बाद मार्च 2026 में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने इसे दोबारा लागू किया। तब से वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुसार इसकी दरों में बदलाव किया जा रहा है।

    सरकार हर दो सप्ताह में इन करों की समीक्षा करती है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों और घरेलू रिफाइनरी कंपनियों को निर्यात से होने वाले मुनाफे को ध्यान में रखा जाता है। इसी आधार पर पेट्रोल, डीजल और ATF पर लगने वाली निर्यात ड्यूटी की दरें तय की जाती हैं।

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