नई दिल्ली। चीन ने रीयूजेबल रॉकेट (Reusable rocket) तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। चीन की निजी अंतरिक्ष कंपनी (LandSpace) ने अपने (Zhuque-3) रॉकेट के बूस्टर को अंतरिक्ष तक भेजने के बाद सफलतापूर्वक वापस जमीन पर उतार दिया। इस उपलब्धि के साथ कंपनी उन चुनिंदा निजी कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने बड़े रॉकेट बूस्टर को अंतरिक्ष से वापस लैंड कराने की तकनीक हासिल की है।
यह तकनीक लंबे समय से अमेरिकी कंपनियों के दबदबे वाला क्षेत्र रही है। ऐसे में LandSpace की सफलता को चीन के निजी स्पेस सेक्टर की महत्वपूर्ण प्रगति के तौर पर देखा जा रहा है।
रॉकेट वापस उतारना इतना बड़ा काम क्यों?
किसी रॉकेट के बूस्टर को लॉन्च के बाद सुरक्षित वापस लाकर दोबारा इस्तेमाल करना अंतरिक्ष अभियानों की लागत घटाने में बेहद अहम माना जाता है।
परंपरागत रॉकेट का बड़ा हिस्सा एक मिशन के बाद इस्तेमाल के लायक नहीं रहता। इसके विपरीत रीयूजेबल बूस्टर को फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे:
हर लॉन्च के लिए नया रॉकेट बनाने की जरूरत कम होती है।
सैटेलाइट लॉन्च की लागत घट सकती है।
एक ही रॉकेट से कई मिशन संचालित किए जा सकते हैं।
कमर्शियल स्पेस इंडस्ट्री को तेजी से विस्तार मिल सकता है।
यही वजह है कि चीन की इस उपलब्धि को अमेरिका के साथ उसकी बढ़ती अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में अहम कदम माना जा रहा है।
66.1 मीटर लंबा है Zhuque-3
चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, 66.1 मीटर लंबे Zhuque-3 को उत्तर-पश्चिमी चीन के डोंगफेंग कमर्शियल स्पेस इनोवेशन पायलट जोन से लॉन्च किया गया।
रॉकेट के पहले चरण में 9 इंजन लगाए गए हैं। लॉन्च के बाद बूस्टर को करीब 390 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व में गांसू प्रांत स्थित लैंडिंग साइट पर वापस उतारा गया।
बताया गया है कि यह Zhuque-3 के रीयूजेबल बूस्टर की सफल लैंडिंग की दिशा में महत्वपूर्ण परीक्षण था।
SpaceX के Falcon 9 से कितनी अलग है तकनीक?
LandSpace ने Zhuque-3 में स्टेनलेस स्टील का इस्तेमाल किया है। कंपनी का दावा है कि यह सामग्री अत्यधिक गर्मी को सहने में सक्षम है और कुछ परिस्थितियों में रॉकेट के निर्माण को अपेक्षाकृत सस्ता बना सकती है।
Zhuque-3 में मीथेन और लिक्विड ऑक्सीजन को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसके विपरीत SpaceX के Falcon 9 में लिक्विड ऑक्सीजन और केरोसिन आधारित ईंधन का इस्तेमाल होता है।
हालांकि क्षमता के मामले में अभी Falcon 9 आगे है। LandSpace के मुताबिक Zhuque-3 एक बार इस्तेमाल में 14.2 टन तक पेलोड लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में पहुंचा सकता है, जबकि Falcon 9 की क्षमता करीब 22.8 टन बताई जाती है।
LandSpace का बड़ा लक्ष्य- 20 बार इस्तेमाल
LandSpace की महत्वाकांक्षा सिर्फ बूस्टर को वापस उतारने तक सीमित नहीं है। कंपनी का लक्ष्य Zhuque-3 के बूस्टर को 20 बार तक दोबारा इस्तेमाल करना है।
अगर कंपनी इसे सफलतापूर्वक हासिल कर लेती है तो लॉन्च लागत को कम करने और कमर्शियल स्पेस मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
अभी SpaceX से काफी पीछे है चीन
रीयूजेबल रॉकेट के क्षेत्र में चीन ने भले ही बड़ी उपलब्धि हासिल की हो, लेकिन SpaceX का अनुभव और लॉन्च स्केल अभी काफी आगे है। Falcon 9 के बूस्टर को कई बार सफलतापूर्वक वापस उतारा और दोबारा इस्तेमाल किया जा चुका है।
SpaceX की लॉन्च फ्रीक्वेंसी भी बेहद ज्यादा है। कंपनी एक साल में बड़ी संख्या में Falcon 9 मिशन संचालित करती है और उसके बूस्टर कई बार उड़ान भर चुके हैं।
इसलिए LandSpace की उपलब्धि को SpaceX की बराबरी के बजाय चीन के निजी अंतरिक्ष उद्योग के तेजी से आगे बढ़ने का संकेत माना जाना ज्यादा सही होगा।
चीन-अमेरिका स्पेस रेस में नया मोर्चा
रीयूजेबल रॉकेट तकनीक आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष कारोबार का अहम आधार बन सकती है। चीन पहले ही सरकारी अंतरिक्ष कार्यक्रम के साथ-साथ निजी कंपनियों को भी इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
Zhuque-3 की सफल बूस्टर लैंडिंग से साफ है कि अमेरिकी कंपनियों के वर्चस्व वाले रीयूजेबल लॉन्च मार्केट में अब चीन गंभीर चुनौती पेश करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि अमेरिका की मौजूदा बढ़त खत्म हुई है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी।
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