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नागरिकों की भलाई धार्मिक दबाव के आगे नहीं झुक सकती-सुप्रीम कोर्ट


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को बकरीद के मौके पर व्यवसायी संघ के लिए कोविड प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के केरल सरकार (Kerala govt) के फैसले की खिंचाई की (Pulled up the verdict) । इस दौरान कोर्ट ने सरकार को नागरिकों की भलाई (Citizens well being) पर ध्यान देने के मद्देनजर कांवड़ यात्रा के संबंध में उनके दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा।


न्यायमूर्ति आर.एफ. नरीमन और बीआर गवई ने कहा, “हम बस यही कह सकते हैं कि यह काफी हैरान कर देने वाली स्थिति है। कैटेगरी डी (उच्च पॉजिटिविटी रेट वाले इलाके) में एक दिन के लिए भी छूट देना पूरी तरह से गलत है। उनके मुताबिक, धर्म या किसी और मुद्दे के मद्देनजर किसी भी समूह का दबाव नागरिकों के जीवन के मौलिक अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।”
याचिकाकर्ता की ओर से शीर्ष अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने बकरीद के लिए कोविड प्रतिबंधों में ढील देने के केरल सरकार के फैसले को चुनौती दी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शीर्ष अदालत को इस मामले में कोई आदेश पारित करना चाहिए क्योंकि आज कोविड के प्रतिबंधों में ढील का आखिरी दिन है।
जस्टिस नरीमन ने इस पर जवाब देते हुए कहा, ” कोई तुक नहीं बनता। सारी चीजें पहले ही तय कर ली गई है। जस्टिस नरीमन ने आगे कहा कि अगर याचिका पहले दायर की जाती, तो कुछ किया भी जा सकता था। सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार द्वारा बकरीद के लिए कोविड प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के संबंध में जारी अधिसूचना को रद्द करने का कोई आदेश पारित नहीं किया।”

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