नई दिल्ली। कर्नाटक (Karnataka) में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। राज्य में सरकार बनने के बाद से मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी खींचतान (Chief Minister) अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि आगामी चुनावी तैयारियों के बीच सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आए, इसलिए अब हाईकमान इस विवाद का समाधान निकालने की तैयारी में है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार की मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाअर्जुन खरगे से मुलाकात हो सकती है। इस बैठक में राहुल गांधी के भी मौजूद रहने की संभावना जताई जा रही है।
2023 में कांग्रेस की जीत के बाद शुरुआती ढाई साल तक सरकार अपेक्षाकृत शांत रही, लेकिन अब सत्ता परिवर्तन के फार्मूले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के भीतर लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर ढाई-ढाई साल का समझौता हुआ था।
हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि लगातार जारी खींचतान का असर प्रशासनिक कामकाज और आगामी चुनावी रणनीति पर न पड़े। वहीं, डीके शिवकुमार समर्थक यह तर्क दे रहे हैं कि उन्होंने संगठन और सरकार दोनों स्तर पर पार्टी लाइन का पालन किया है, इसलिए अब उन्हें मौका मिलना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा इसी संभावना की है कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। संगठन पर मजबूत पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच प्रभाव को देखते हुए यह फैसला उनके समर्थकों के लिए बड़ी जीत माना जाएगा।
अगर ऐसा होता है, तो माना जा रहा है कि सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में भेजा जा सकता है और उन्हें राज्यसभा की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके साथ ही राज्य मंत्रिमंडल में भी बड़ा फेरबदल संभव है।
दूसरे विकल्प के तौर पर पार्टी सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाए रखते हुए कैबिनेट में बदलाव कर सकती है। इस फॉर्मूले के तहत डीके शिवकुमार खेमे को ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।
कमजोर प्रदर्शन वाले मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को मौका देने पर भी विचार चल रहा है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि सरकार और संगठन दोनों स्तर पर संतुलन बनाकर अगले चुनाव की तैयारी शुरू की जाए।
तीसरा और सबसे कम संभावित विकल्प कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को राज्य की कमान सौंपने का माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यदि दोनों गुटों के बीच सहमति नहीं बनती, तो खरगे एक सर्वमान्य चेहरे के तौर पर सामने आ सकते हैं।
हालांकि, ऐसा होने पर पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं, क्योंकि फिलहाल खरगे कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
भले ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के खिलाफ तीखे बयान देने से परहेज किया हो, लेकिन दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच तनातनी लगातार बढ़ती दिख रही है।
शिवकुमार समर्थकों का कहना है कि सत्ता साझा करने का वादा पूरा होना चाहिए, जबकि सिद्धारमैया खेमे का दावा है कि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान ही करेगा।
अब सबकी नजर दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी है, जहां तय हो सकता है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता का अगला चेहरा कौन होगा।
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