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Crude Oil Price: तेल को लेकर सऊदी अरब ने चली ये नई चाल


नई दिल्ली: विश्व के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शुमार सऊदी अरब ने हाल ही में एक चेतावनी दी थी कि ओपेक प्लस (OPEC+) देश तेल का उत्पादन घटा सकते हैं. सऊदी की इस चेतावनी के बाद दुनियाभर में तेल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला. विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी अरब के इस बयान के पीछे मंशा तेल की कीमतों में इजाफा ही थी क्योंकि सऊदी की तेल से कमाई पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं.

सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल्ल अजीज बिन सलमान ने सोमवार को कहा था कि ओपेक प्लस देश तेल के उत्पादन में कटौती कर सकते हैं. उनके इस बयान से वैश्विक बाजारों में खलबली मच गई. कुछ दिनों के भीतर ही ओपेक के कई अन्य सदस्यों ने सऊदी के इस बयान का समर्थन भी किया. ऐसी रिपोर्ट्स भी थीं कि ईरान परमाणु समझौते की बहाली की दिशा में अगर ईरान का तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचा तो ओपेक प्लस देश तेल उत्पादन में कटौती कर सकते हैं.

इन बयानों के बाद अंतर्राष्ट्रीय ऑयल बेंचमार्क पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. विश्लेषकों का कहना है कि दरअसल सऊदी अरब की रणनीति तेल की कीमतों में वृद्धि की रही है ताकि इससे सऊदी अरब जितनी हो सके, उतनी अपनी जेबें भर सके.

मॉर्निंगस्टार (Morningstar) में यूटीलिटीज एंड एनर्जी एनालिस्ट स्टीफन एलिस ने कहा, अधिकतर बाजारों में उथल-पुथल से कीमतों में इजाफा हुआ है और ठीक ऐसा ही सऊदी अरब चाहता था. सऊदी अरब मंदी को लेकर अधिक चिंतित दिखाई देता है, क्योंकि इससे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी. ऐसे में सऊदी अरब जब तक संभव हो सके, तेल की बढ़ी हुई कीमतों का लाभ उठाना चाहता है.


ईरान का तेल वैश्विक बाजार पहुंचने की संभावना
इस बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने से तेल की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान वैश्विक बाजारों में एक दिन में 10 लाख बैरल तेल की सप्लाई कर सकता है. इससे कुछ राहत मिल सकती है क्योंकि दिसंबर तक रूस के कच्चे तेल पर यूरोप के आंशिक प्रतिबंध लागू हो सकते हैं.

विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे में तेल के उत्पादन में कटौती का सऊदी अरब का बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऐसे समय में आया है, जब ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल तक हो गई. कैप्लर के लीड क्रूड एनालिस्ट विक्टर कटोना का कहना है कि सऊदी अरब को सिर्फ पैसा चाहिए और वह तेल के ऐसे मूल्य निर्धारण (Pricing) माहौल से बचना चाहता है, जो उतना सुविधाजनक नहीं है, जितना वह पहले हुआ करता था.

एक तरफ सऊदी अरब तेल की कीमतों में इजाफा करने का प्रयास कर रहा है तो वहीं अमेरिका कीमतों को नीचे लाने के प्रयासों में जुटा है. कटोना का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने से तेल की कीमतों में कटौती हो सकती है लेकिन सऊदी अरब अपनी भूराजनीतिक स्थिति का इस्तेमाल कर तेल उत्पादन में कटौती को लेकर चेतावनी दे रहा है.

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