नई दिल्ली। आर्थिक संकट (economic crisis) से जूझ रहे मालदीव (Maldives) ने एक बार फिर भारत की ओर रुख किया है। बढ़ते कर्ज और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू (Mohammed Muizzou) की सरकार ने भारत से करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने की अपील की है। हालांकि, भारत के लिए मौजूदा नियमों और शर्तों
के चलते इस मांग पर फैसला लेना आसान नहीं माना जा रहा।
दरअसल, मालदीव इस समय गंभीर वित्तीय दबाव में है। अंतरराष्ट्रीय कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है। ऊपर से पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन सेक्टर को झटका दिया है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने संकट को और गहरा कर दिया है।
नियम बने बड़ी बाधा
सूत्रों के अनुसार, मालदीव ने भारत से करेंसी स्वैप सुविधा के विस्तार की मांग की है, लेकिन भारतीय व्यवस्था में दो बार निकासी के बीच ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ अनिवार्य होता है। इसके अलावा कर्ज को आगे बढ़ाने (रोल-ओवर) की भी सीमाएं तय हैं। ऐसे में तकनीकी कारणों से भारत के लिए तुरंत राहत देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि इस बार मदद नहीं मिलती, तो मालदीव की आर्थिक हालत और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारत पहले भी दे चुका है सहारा
भारत पहले भी कई बार मालदीव की मदद करता रहा है। अक्टूबर 2024 में 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा दी गई थी, जिसे दो बार बढ़ाया गया। इसके अलावा 2025 में 50-50 मिलियन डॉलर के ब्याज मुक्त ट्रेजरी बिलों की अवधि भी बढ़ाई गई।
जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान 565 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट देने और कर्ज चुकाने की शर्तों में राहत का ऐलान भी किया गया था।
वैश्विक एजेंसियों ने भी मालदीव की स्थिति को चिंताजनक बताया है। Fitch Ratings ने देश की रेटिंग ‘CC’ पर रखी है, जो डिफॉल्ट के उच्च खतरे का संकेत देती है, जबकि Moody’s ने ‘CAA2’ रेटिंग बरकरार रखी है।
कर्ज चुकाने से खाली हुआ खजाना
अप्रैल 2026 में मालदीव पर करीब 1 अरब डॉलर चुकाने का दबाव था। इसमें 500 मिलियन डॉलर का सुकुक बॉन्ड शामिल था, जिसे सरकार ने अपने सॉवरेन डेवलपमेंट फंड से चुका दिया। हालांकि, इससे विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी कमी आ गई।
पर्यटन पर टिकी अर्थव्यवस्था
मालदीव की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है। लेकिन मिडिल ईस्ट संकट के चलते पर्यटकों की संख्या घटी है और ईंधन महंगा हुआ है। ऐसे हालात में नए कर्ज जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है।
कुल मिलाकर, मालदीव इस समय आर्थिक मोर्चे पर नाजुक दौर से गुजर रहा है और उसकी नजरें एक बार फिर भारत की मदद पर टिकी हैं।
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