
400 छोटे भूखंड सदस्यों को बांटे, फिर जादूगरों की नजर पड़ी और 7 एकड़ कर गए हड़प
अग्निबाण खोल रहा है कनाडिय़ा रोड स्थित चर्चित एक हजार करोड़ से ज्यादा की 13 एकड़ का पूरा कच्चा चि_ा, हाजी एंड संस से संस्था और फिर संयम इन्फ्रा सहित निजी हाथों तक कैसेपहुंची जमीन
– 1974 में हाजी एंड संस ने 25 एकड़ जमीन सालीग्राम और गणेश से खरीदी
– 1994 में खजराना की इस जमीन पर की गई पॉवर ऑफ अटार्नी
– 13 एकड़ जमीन पॉवर ऑफ अटार्नी से ही डायमंड गृह निर्माण को बेची गई
– पॉवर को फर्जी बताकर कोर्ट से रजिस्ट्री करवाई शून्य
– 2024 में कोर्ट ने पॉवर को वैध बताया और आरोप किए खारिज
– पेट्रोल पम्प, वाहन शोरूम सहित कई व्यवसायिक गतिविधियां भी संचालित
इंदौर। कनाडिय़ा रोड (kanaadiya road) स्थित खजराना (Khajrana) की लगभग 25 एकड़ जमीन को कुछ वर्ष पूर्व शहर के चर्चित जादूगरों की नजर में आई और उस पर कब्जे के खेल शुरू हो गए। पिछले हफ्ते कनाडिय़ा थाने के जवानों के साथ मार-पिटाई और उसके बाद चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जमीनी जादूगर दीपक मद्दा से पूछताछ भी की गई और जमीन खाली कराने का राज खुला। अग्रिबाण (Agniban) ने अपनी खोज-पड़ताल कर इस पूरी जमीन का कच्चा चि_ा तैयार किया, जो अभी तक उजागर नहीं हुआ और सहकारिता विभाग को भी गलत जानकारी देकर डायमंड गृह निर्माण को परिसमापन में लेने की कार्रवाई शुरू करवा दी, जबकि संस्था और उसका पंजीयन अभी जिंदा है। 11 हाजियों ने 52 साल पहले 1974 में खजराना के ही किसान परिवार शालीग्राम और गणेश से ये 25 एकड़ जमीन खरीदी। इसके बाद 1994 में इसमें से लगभग 13 एकड़ जमीन 35 लाख रुपए में डायमंड गृह निर्माण को बिकी और उसी में से 7 एकड़ जमीन संयंम इन्फ्रा सहित अन्य ने खरीदी और एक हिस्से पर आलोक नगर भी बस गया।
खजराना की खसरा नम्बर 1105 और 1528 की 10.141 हेक्टेयर यानी 25.06 एकड़ जमीन हाजी एंड कम्पनी तर्फे हाजी हबीब दादा ने 1974 में खरीदी और फिर 1994 में 80 साल के हो चुके हाजी हबीब ने इस जमीन को बेचने के लिए शेख इब्राहिम के नाम पॉवर ऑफ अटार्नी देकर उसे अपना आम मुख्त्यार नियुक्त किया, जिसके बाद 2003 में आम मुख्त्यार घोषित शेख इब्राहिम ने पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिए ही 5.261 हेक्टेयर यानी लगभग 13 एकड़ जमीन 35 लाख रुपए में रजिस्टर्ड विक्रय-पत्र के माध्यम से डायमंड गृह निर्माण संस्था को बेची और इस संस्था का गठन शेख मुश्ताख ने कॉलोनी काटने के लिए किया और लगभग 400 छोटे भूखंड जो 500-600 स्क्वेयर फीट तक के थे, वह अत्यंत कम मूल्य पर गरीब परिवारों, जिनमें अधिकांश मुस्लिम थे, उन्हें आबंटित किए। उस वक्त संस्था के अध्यक्ष किशनलाल थे। 2007 में बीमारी और अत्यंत बुजुर्ग हो चुके हबीब दादा से एक फर्जी एफआईआर खजराना थाने पर करवाई गई, जिसमें आरोप लगाया कि पॉवर ऑफ अटार्नी होल्डर शेख इब्राहिम ने कूटरचित और फर्जी तरीके से डायमंड गृह निर्माण को जमीन बेची। इस एफआईआर के आधार पर पुलिस ने 90 साल के किशनलाल सहित संस्था के शेख मुश्ताख और उसके तीन भाइयों और नाबालिग बच्चों सहित आठ लोगों को आरोपी बना लिया और गिरफ्तार कर जेल भी भिजवाया। 2010 में कोर्ट में चालान पेश किया गया और 2012 में इसी एफआईआर के आधार पर कोर्ट को भी गुमराह कर संस्था की रजिस्ट्री और पॉवर ऑफ अटार्नी को शून्य घोषित करवा दिया। इसी आधार पर जमीनी जादूगरों ने अपना खेल शुरू किया और सहकारिता विभाग के माध्यम से संस्था को परिसमापन में लेने और आबंटित किए गए भूखंडों को भी अवैध बताकर बने मकानों को खाली कराने और कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू हुई और 2014 में संयंम इन्फ्रा ने 7 एकड़ जमीन खरीदी और फिर खाली कराने का ठेका 6 करोड़ में बब्बू-छब्बू को दिया और उसके बाद यही प्रक्रिया अभी पिछले दिनों अपनाई गई, जब जमीन खाली कराने गए गुंडों ने कनाडिय़ा थाने के दो पुलिस जवानों की बुरी तरह से पिटाई कर दी और जब मामला मीडिया में उछला तो उसके बाद भोपाल तक हल्ला मचा और पुलिस कमिश्रर संतोष सिंह की सख्ती के चलते चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उनसे मिली जानकारी के आधार पर संयंम इन्फ्रा के डायरेक्टर प्रतीक संघवी से दस्तावेज प्राप्त किए, फिर अगले दिन दीपक मद्दा को भी पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया और अब इनसे पुलिस ने दस्तावेज, एग्रीमेंट सहित अन्य जानकारी मांगी है। दूसरी तरफ 20 दिसम्बर 2024 को सेशन न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश जितेन्द्रसिंह कुशवाह ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें हाजी एंड कम्पनी द्वारा डायमंड गृह निर्माण संस्था पर फर्जी और कूटरचित पॉवर ऑफ अटार्नी के माध्यम से शेख इब्राहिम को जमीन खरीदने के आरोप से बरी किया। साथ ही इस कथित जमीन फर्जीवाड़े के मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों को भी बरी किया गया, जिसमें शेख मुश्ताख, शेख इब्राहिम, शेख ईस्माइल और शेख इदरीस शामिल रहे। इन पर 2007 में दर्ज करवाई एफआईआर के आधार पर हाजी कम्पनी की जमीन पॉवर ऑफ अटार्नी के जरिए अवैध तरीके सेबेचने के आरोप लगाए गए। जबकि न्यायालय ने पाया कि इनमें से एक भी आरोप साबित नहीं किया जा सका। यानी डायमंड गृह निर्माण संस्था को जिस पॉवर ऑफ अटार्नी से जमीन बेची गई वह वैध साबित हुआ, जिसके चलते संयम इन्फ्रा व अन्य को बिकी जमीनें अवैध हो गई है। पेट्रोल पम्प, वाहन शोरूम के साथ हाजी एंड कम्पनी से बिकी जमीन पर आलोक नगर भी बसा है।
चारों आरोपियों का दो दिनी रिमांड और मिला पुलिस को
कनाडिय़ा थाने ने इस मामले में जहां संयंम इन्फ्रा के डायरेक्टर प्रतीक संघवी और इस जमीन से जुड़े दीपक मद्दा से पूछताछ की, वहीं डीसीपी अमनसिंह राठौर के मुताबिक, चारों आरोपियों को कल कोर्ट में पेश किया और दो दिन का रिमांड और हासिल किया गया। मोहसीन अली, मोहम्मद अफजल, दर्शन कृष्णारे और चंदन वर्मा से पुलिस और भी जानकारी निकलवा रही है। दूसरी तरफ प्रशासन और सहकारिता विभाग ने भी अग्रिबाण द्वारा किए गए नए खुलासे के चलते संस्था की जांच शुरू करवाई। कलेक्टर शिवम वर्मा ने भी सहकारिता विभाग से रिपोर्ट मांगी है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस संस्था पर प्रशासक की नियुक्ति भी बीते कई वर्षों से है और परिसमापन की कार्रवाई भी नहीं हो सकी थी और अब तो 2024 को अदालती आदेश भी सामने आ गया है, जिसमें संस्था को बेची गई जमीन की वैधता की पुष्टि हो गई है। यानी जिन लोगों को छोटे भूखंड यहां दिए गए वे उसके पात्र हैं और जमीन खाली करवाने का अधिकार संयंम इन्फ्रा सहित निजी लोगों को नहीं है। यह भी उल्लेखनीय है कि हाजी एंड कम्पनी की जमीन संस्था के साथ-साथ कुछ रसूखदारों ने भी खरीद रखी है।
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