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डिंडौरी स्वास्थ्य विभाग में 60.60 लाख का गबन, छह पर एफआईआर

October 23, 2026

  • जबलपुर ईओडब्ल्यू की जांच में एरियर और भत्तों के भुगतान में अनियमितता उजागर

जबलपुर। डिंडौरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में शासकीय राशि के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जबलपुर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने जांच के बाद करीब 60.60 लाख रुपये के कथित अनियमित एवं दोहरे भुगतान के मामले में छह अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों में तत्कालीन दो सीएमएचओ, दो जिला स्वास्थ्य अधिकारी तथा कार्यालय के दो कर्मचारी शामिल हैं। मामला एक अप्रैल 2016 से 31 दिसंबर 2025 के बीच हुए कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। ईओडब्ल्यू के अनुसार, जांच में एरियर की गलत गणना, कर्मचारियों को पात्रता से अधिक भुगतान, भत्तों की मद में अनियमितता और आवश्यक कार्यालयीन आदेशों के बिना राशि जारी करने जैसे तथ्य सामने आए हैं। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।


  • भत्तों में भी 5.89 लाख के अतिरिक्त भुगतान का आरोप
    जांच में गैर-प्रैक्टिस भत्ता और गृह भाड़ा भत्ता के भुगतान में भी अनियमितता पाए जाने का दावा किया गया है। आरोप है कि बिना आवश्यक वैधानिक आदेश के भुगतान की मद में बदलाव कर दोनों मदों में कुल 5.89 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। ईओडब्ल्यू के अनुसार, निर्धारित नियमों और पात्रता की जांच किए बिना राशि जारी किए जाने से शासन को वित्तीय नुकसान हुआ। भुगतान से संबंधित आदेशों और दस्तावेजों की भूमिका भी विवेचना के दायरे में है।

    तत्कालीन सीएमएचओ सहित छह आरोपी
    ईओडब्ल्यू ने अपराध क्रमांक 109/2026 के तहत आरके मेहरा, रमेश सिंह मरावी, बल्देव सिंह भलावी, भरत सिंह टेकाम, गुलाब साहू और प्रकाश परस्ते को आरोपी बनाया है। इनमें आरके मेहरा और रमेश सिंह मरावी तत्कालीन सीएमएचओ रहे हैं, जबकि बल्देव सिंह भलावी और भरत सिंह टेकाम तत्कालीन जिला स्वास्थ्य अधिकारी थे। गुलाब साहू सहायक ग्रेड-3 और प्रकाश परस्ते पर्यवेक्षक के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि भुगतान संबंधी विवरण तैयार करने और स्वीकृति देने में इनकी भूमिका रही है।

    एरियर भुगतान में 49.89 लाख की गड़बड़ी का आरोप
    जांच के मुताबिक, कथित अनियमितताओं का सबसे बड़ा हिस्सा एरियर भुगतान से संबंधित है। आरोप है कि आईएफएमआईएस पोर्टल पर गलत एरियर गणना पत्रक तैयार कर कर्मचारियों को उनकी वास्तविक पात्रता से अधिक राशि का भुगतान किया गया। कुछ मामलों में आवश्यक वैधानिक आधार के बिना भी भुगतान संबंधी प्रविष्टियां दर्ज की गईं।

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