
उज्जैन। सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी के पानी से स्नान कराने की तैयारी अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। करीब 600 करोड़ रुपए की सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी परियोजना का 84 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। योजना के तहत सेवरखेड़ी में बैराज और सिलारखेड़ी में 51 एमसीएम क्षमता का विशाल बैलेंसिंग रिजर्वायर तैयार किया गया है। पंपिंग स्टेशन और अन्य शेष काम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं।
योजना का उद्देश्य बारिश के दौरान शिप्रा का पानी सहेजकर उसे जरूरत के समय नदी में छोडऩा है, ताकि सिंहस्थ के दौरान घाटों पर पानी की उपलब्धता बनी रहे। अब तक सिंहस्थ के दौरान गर्मी और पानी की कमी के कारण शिप्रा में गंभीर बांध या नर्मदा का पानी छोडऩा पड़ता था। वर्ष 2016 के सिंहस्थ में भी नदी में पर्याप्त पानी बनाए रखना चुनौती रहा था। इस बार शिप्रा के अपने जल से स्नान कराने की तैयारी के तहत नदी के पानी को संग्रहित करने और जरूरत के अनुसार वापस प्रवाहित करने की व्यवस्था की जा रही है।
ऐसे काम करेगी योजना
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल के मुताबिक, परियोजना के दो प्रमुख हिस्से हैं। पहला, शिप्रा पर सेवरखेड़ी में बैराज बनाकर बारिश के पानी को रोकना और दूसरा, उस पानी को पंपिंग के जरिए सिलारखेड़ी तक पहुंचाकर बड़े रिजर्वायर में जमा करना।
5 किमी पाइपलाइन से फिर शिप्रा में पहुंचेगा पानी
सिलारखेड़ी में जमा पानी को वापस शिप्रा नदी तक पहुंचाने के लिए करीब पांच किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। खास बात यह है कि पानी को नदी तक पहुंचाने के लिए दोबारा पंपिंग की जरूरत नहीं होगी। रिजर्वायर से पानी गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रेविटी के सिद्धांत पर पाइपलाइन के जरिए कुंवारिया गांव के पास शिप्रा में छोड़ा जाएगा। यह स्थान किठोदा बैराज के ठीक ऊपर बताया गया है। यहां से पानी शनि मंदिर और गऊघाट होते हुए रामघाट, मंगलनाथ और सिद्धनाथ तक पहुंच सकेगा। योजना के अनुसार रिजर्वायर में संग्रहित पानी को धीरे-धीरे छोड़कर करीब नौ महीने तक शिप्रा का प्रवाह बनाए रखने का लक्ष्य है।
सेवरखेड़ी बैराज में रोका जाएगा पानी….
शिप्रा नदी पर सेवरखेड़ी गांव में 1.45 एमसीएम क्षमता का बैराज बनाया गया है। बारिश के दौरान इसके गेट लगाकर पानी रोका जाएगा। इसके बाद चार मोटरों की मदद से पानी को करीब 6.5 किलोमीटर दूर सिलारखेड़ी पहुंचाया जाएगा। प्रत्येक मोटर की क्षमता 1350 किलोवाट है। पंपिंग स्टेशन इस व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
सिंहस्थ के बाद भी शिप्रा में बना रहेगा प्रवाह…
सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालु शिप्रा में स्नान करते हैं। ऐसे में नदी में पर्याप्त पानी बनाए रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती रहती है। सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी परियोजना इसी समस्या का स्थायी समाधान तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बारिश के पानी का संग्रहण होने से नदी में पानी की कमी के समय रिजर्वायर का उपयोग किया जा सकेगा। हालांकि, योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बारिश में कितना पानी उपलब्ध होता है, रिजर्वायर कितना भरता है और जरूरत के अनुसार पानी कितने समय तक छोड़ा जा सकता है। परियोजना पूरी होने के बाद सिंहस्थ 2028 में शिप्रा के जल से स्नान कराने की तैयारी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सिलारखेड़ी में 51 एमसीएम पानी का भंडारण…
सिलारखेड़ी तालाब का विस्तार कर इसे बड़े जल भंडारण केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। आसपास की सरकारी जमीन का उपयोग करते हुए करीब 35 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण किया गया। यहां लगभग 250 हेक्टेयर क्षेत्र में बैलेंसिंग रिजर्वायर बनाया गया है, जिसकी भंडारण क्षमता 51 एमसीएम यानी करीब 1800 एमसीएफटी बताई गई है। तुलना करें तो गंभीर बांध की क्षमता करीब 2200 एमसीएफटी है। रिजर्वायर के चारों ओर करीब 6.5 किलोमीटर लंबा मिट्टी का बांध बनाया गया है। इसकी ऊंचाई जमीन की सतह से लगभग 20 मीटर है। बारिश के दौरान शिप्रा से पानी पंप कर इस रिजर्वायर में जमा किया जाएगा। इस तरह नदी में उपलब्ध पानी को एक जगह सहेजकर बाद में जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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