छतरपुर। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Saurabh Das, Abhijit Deepke, State) की भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। मथुरा-वृंदावन (Mathura-Vrindavan) के साधु-संतों ने इस पर नाराजगी जताई है। इसी क्रम में फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा (Dinesh Sharma) ने भी धीरेंद्र शास्त्री की आलोचना करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण में भेद करना सनातन धर्म का अपमान है। दिनेश शर्मा वही संत हैं, जिन्होंने पूर्व में क्रिकेटर विराट कोहली के प्रेमानंद महाराज के आश्रम आने को लेकर पांच करोड़ रुपये लेने का दावा किया था।
‘ब्रजवासी कृष्ण का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे’
दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण संपूर्ण विश्व के पालनहार हैं। उनके बारे में इस तरह की टिप्पणी करना बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा, “भगवान श्रीकृष्ण के लिए ऐसी टिप्पणी करना ठीक नहीं है। बृजवासी इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। भगवान राम और कृष्ण में भेद करना सनातन धर्म का अपमान है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।”
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर-मस्जिद प्रकरण के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज सहित अन्य साधु-संतों ने भी धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर नाराजगी जताई है। संतों का कहना है कि ब्रज की धरती पर उनके आराध्य भगवान श्रीकृष्ण का अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार, भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों एक ही सनातन परंपरा के आराध्य हैं।
यह विवाद मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ। वायरल वीडियो में वह भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते सुनाई दे रहे हैं।
वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री कहते हैं कि भगवान श्रीराम सीधे खड़े होते हैं और उनका धाम अयोध्या भी सीधा है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े होकर खड़े होते हैं। उन्होंने श्रीकृष्ण की मुद्रा और बांसुरी का उल्लेख करते हुए धनुष चलाने को अधिक कठिन बताया।
उन्होंने कहा कि बांसुरी बजाना कोई बड़ा काम नहीं है, जबकि धनुष चलाना हर किसी के बस की बात नहीं है। इस टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मथुरा-वृंदावन के संतों और कृष्ण भक्तों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
धीरेंद्र शास्त्री की ओर से सफाई का इंतजार
भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर विरोध बढ़ने के बीच धीरेंद्र शास्त्री की ओर से इस मामले में कोई नई सफाई सामने नहीं आई है। संतों की नाराजगी के बाद यह विवाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।
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