
नई दिल्ली: देश के पूर्व थल सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी नई किताब, सेना की भूमिका, चीन और पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों, ऑपरेशन सिंदूर और बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात पर विस्तार से अपनी राय रखी. एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने अपनी किताब ‘फोर स्टार डेस्टिनी’ को लेकर उठे विवाद पर भी खुलकर बातचीत की.‘ जो उचित समझो, वो करो’- इस लाइन पर संसद में विवाद हुआ था. अब नरवणे ने इस पर सफाई पेश की. उन्होंने साफ किया कि इस कथन का गलत मतलब निकाला गया और इसे सेना के कामकाज के सही संदर्भ में समझने की जरूरत है.
इस विवादित लाइन पर नरवणे ने कहा कि सेना को ऑपरेशन के दौरान पूरी छूट दी जाती है. इसका सीधा मतलब यह होता है कि सरकार को सेना पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा कि इस बयान को उसी नजरिए से देखना चाहिए, लेकिन अगर कोई इसे गलत तरीके से समझना चाहता है, तो फिर कुछ नहीं किया जा सकता.
मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी किताब ‘फोर स्टार डेस्टिनी’ को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की. इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद इस किताब की फाइनल कॉपी नहीं देखी है. उनके मुताबिक, यह किताब कहां से आई और किस रूप में बाहर आई, इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते. प्रकाशक ने भी साफ किया है कि इसकी कोई आधिकारिक कॉपी सर्कुलेशन में नहीं है.
इस मुद्दे को संसद में राहुल गांधी द्वारा उठाए जाने पर नरवणे ने सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि जिस किताब का आधिकारिक अस्तित्व ही स्पष्ट नहीं है, उस पर बहस करना उचित नहीं है.
मनोज मुकुंद नरवणे ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सेना पूरी तरह गैर-राजनीतिक है. उन्होंने कहा कि सेना का काम सिर्फ राजनीतिक नेतृत्व के आदेशों का पालन करना होता है. इससे यह निष्कर्ष निकालना गलत है कि सेना राजनीति में शामिल हो गई है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एक जूनियर अपने सीनियर के आदेश का पालन करता है, उसी तरह सेना भी करती है.
चीन के साथ सीमा विवाद पर नरवणे ने कहा कि हर सैन्य कार्रवाई पूरे देश का सामूहिक प्रयास होती है. उन्होंने दावा किया कि भारत ने एकजुट होकर जवाब दिया, जिसके चलते चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को पीछे हटना पड़ा. उन्होंने कहा कि यह भारत की बड़ी सफलता थी.
नरवणे ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस बार रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला. उन्होंने बताया कि केवल आतंकी ठिकानों को ही नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व के मुख्यालय को भी निशाना बनाया गया. उनके मुताबिक, इससे पाकिस्तान को साफ संदेश गया कि भारत अब सीधे और कड़े जवाब देने के लिए तैयार है.
ईरान-अमेरिका जैसे वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए मनोज मुकुंद नरवणे ने कहा कि हर युद्ध से सीख मिलती है. उन्होंने जोर दिया कि भारत को हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा-चाहे वह तेल हो या जरूरी खनिज संसाधन.
पाकिस्तान को लेकर उन्होंने कहा कि वह हमेशा वैश्विक हालात का फायदा उठाने की कोशिश करता रहा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि ‘ग्लोबल वॉर ऑन टेरर’ और अफगानिस्तान के मामलों में भी पाकिस्तान ने खुद को अमेरिका के साथ जोड़कर फायदा उठाने की कोशिश की थी. हालांकि, उनके मुताबिक, इस रणनीति के लंबे समय में नकारात्मक परिणाम ही सामने आए हैं.
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