
इंदौर, कमलेश्वरसिंह सिसौदिया। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में इन दिनों नियमों की नहीं, बल्कि इंजीनियरों की मनमानी की सप्लाई हो रही है। भ्रष्टाचार और बेलगाम कार्यप्रणाली की पराकाष्ठा देखिए कि शहर के मांगलिया इलाके से बिजली के खंभों समेत पूरा ट्रांसफार्मर ही गायब हो गया और विभाग के आला अफसरों को इसकी कानोकान खबर तक नहीं हुई। जब सीधे एमडी (मैनेजिंग डायरेक्टर) के पास शिकायत पहुंची, तब जाकर विभाग की नींद टूटी। फिलहाल एक महीने से कछुआ चाल से जांच जारी है, जो अधिकारियों की कमजोर पकड़ को बयां कर रही है।
मांगलिया की द्वारकाधाम कॉलोनी में हुए इस कारनामे ने सबको चौंका दिया है। तकनीकी रूप से बिना शटडाउन लिए ट्रांसफार्मर उतारना जानलेवा और नामुमकिन है। जाहिर है कि इस खेल में विभाग का लाइन स्टाफ और इंजीनियर पूरी तरह शामिल हैं। ताज्जुब की बात यह है कि मुख्यालय पर हर 5 मिनट की ट्रिपिंग का हिसाब रहता है, लेकिन जमीन से भारी-भरकम ट्रांसफार्मर गायब हो गया और जोन से लेकर अधीक्षण यंत्री तक के अधिकारी अनजान बने रहे।
दागियों पर मेहरबानी: सस्पेंशन के बाद मलाईदार पोस्टिंग
बिजली कंपनी में भ्रष्टाचार का वायरस इतना गहरा है कि यहां कार्रवाई का खौफ खत्म हो चुका है। सवा साल पहले भौंरासला जोन में बिना कनेक्शन फैक्ट्री चलाने और अवैध ट्रांसफार्मर का बड़ा कांड फूटा था। तब भी इंजीनियर सस्पेंड हुए थे, लेकिन चर्चा है कि उन्हें फिर से इंदौर के ही अच्छे पदों पर नवाज दिया गया। इसी सस्पेंड हो, फिर मलाई काटो वाली नीति के कारण इंजीनियरों के हौसले बुलंद हैं।
विभाग को चूना लगाने का सिलसिला जारी
ठ्ठ नवंबर 2024 (भौंरासला कांड): बिना कनेक्शन फैक्ट्री में बिजली और अवैध ट्रांसफार्मर का संचालन, तीन इंजीनियरों को तत्काल हटाया था। इसके बाद आधा दर्जन इंजीनियरों पर गिरी थी गाज।
ठ्ठ 8 माह पूर्व (तिलक नगर): निजी कॉलोनियों में सरकारी आरडीएसएस योजना के पोल अवैध रूप से लगे मिले।
ठ्ठ डेढ़ साल पहले (सुखलिया): लाइनमैन के घर पर कंपनी के सामान का अवैध जखीरा बरामद हुआ।
ठ्ठ हालिया वीडियो: सुखलिया जोन से ही सरकारी सामान को बाजार में खुलेआम बेचते हुए वीडियो वायरल, कार्रवाई अब भी ठंडे बस्ते में।
इंजीनियर-कर्मचारी बिंदास
शहर में अघोषित बिजली कटौती और ट्रिपिंग से आम जनता बेहाल है। उपभोक्ताओं को मामूली खराबी पर घंटों इंतजार कराया जाता है। बिजली बिल में सुधार करवाना है तो महीनो चप्पल घिसना पड़ती है, लेकिन दूसरी तरफ सरकारी संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने का संगठित गिरोह विभाग के भीतर ही पनप रहा है।
द्वारकाधाम कॉलोनी में ट्रांसफार्मर गायब होना वाकई आश्चर्यजनक है। हमने दो इंजीनियरों की जांच कमेटी गठित की है। रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में है।
डी.के. गाठे, शहर अधीक्षण यंत्री, इंदौर
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